चर्चा के विषय से इतर बीच-बीच में दार्शनिक ज्ञान अवश्य बघारें। जरूरत के हिसाब से नास्तिक की अलग-अलग श्रेणियों यथा ईश्वरद्रोही, ईश्वर को न मानने वाला या सिद्ध होने पर ईश्वर को मान लेने की श्रेणी में कूद-फांद करते रहें।
बानगियों की कमी नहीं है यह जानने के लिए कि आखिर एक सेक्युलर समाज में ऐसी क्या कमी है जो अलगाववादियों को वह मंज़ूर नहीं, और जिससे कश्मीर को आज़ाद कराने के लिए बुरहान वानी और आदिल डार ने जान लेने और देने में कोई संकोच नहीं किया।