विकास दुबे और श्रीप्रकाश शुक्ला दोनों ही अपराधियों में कई बातें एक जैसी हैं, दोनों के जीवन का शुरूआती जीवन हो या अंत, एनकाउंटर के अलावा ऐसी तमाम बातें हैं जब दोनों एक जैसे ही नज़र आते हैं।
विकास दुबे की माँ ने कहा, "सरकार जो उचित समझे वो करे, हमारे कहने से कुछ नहीं होगा। मेरा बेटा बीजेपी में नहीं, सपा में है और महाकाल ने विकास को बचा लिया।”
कानपुर के लोग विकास दुबे को गुनाह और दरिंदगी का दूसरा चेहरा मानते हैं। विकास दुबे ने स्कूल में पढ़ते समय ही वहाँ के प्रिंसिपल की बर्बरतापूर्ण हत्या कर दी थी। स्कूल केे प्रिंसिपल सिद्धेश्वर पांडेय काफी बुजुर्ग थे।
पुलिस और एसटीएफ की टीम कुख्यात अपराधी विकास दुबे के गैंग के सभी गुर्गों पर भी अपनी नज़र बनाए हुए है। इसी क्रम में पुलिस ने अब तक विकास दुबे के पाँच साथियों को अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराया है।