महिला डर कर उनके साथ सूरजपुर के अदालती परिसर गई तो वहाँ उससे उन कागजों पर जबरन साइन कराया गया जिसमें लिखा था कि वह स्वेच्छा से ₹50000 के बदले इस संबंध से अलग हो रही है। इस दौरान आरोपित शौहर महबूब के साथ उसके दो भाई भी थे।
महिला ने आरोप लगाया, "कई सालों तक मुझपर अत्याचार करने के बाद, कुछ दिन पहले उसने मुझे उसका घर छोड़ने को कहा। लेकिन जब मैंने मना किया, तो उसने मुझे तीन तलाक दे दिया।"
आयशा का कहना है कि उसके अम्मी-अब्बू ने फर्जी कागजात तैयार करवाए और उसमें दिखाया कि तीन अलग-अलग तारीखों में उसने अपने पति को तलाक दिया, जबकि यह बात गलत है।
योगी ने हिन्दू महिलाओं के अधिकारों को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि शादी के बाद किसी दूसरी महिला से संबंध रखने वाले हिंदू पुरुषों पर भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही हिंदू परित्यक्ता महिलाओं को भी तीन तलाक पीड़िताओं की तरह ही न्याय दिलाया जाएगा।
तीन तलाक देने के बाद आजाद ने आरफा से मारपीट भी की और फिर उसे घर से भी निकाल दिया। पीड़िता की मानें तो उसे उसके पति ने अतिरिक्त दहेज के बिना वापस लौटने पर हत्या की भी धमकी दी।
इस घटना के बाद इस शख्स ने एसपी को प्रार्थना पत्र लिखकर अपनी पत्नी और पिता के ख़िलाफ़ केज दर्ज करने का आग्रह भी किया और कहा कि ट्रिपल तलाक पर बने नए कानून के तहत वह सजा भुगतने को भी तैयार है।
पीड़िता की बहन ने आरोप लगाया कि मोहम्मद अफजल और उसका पूरा परिवार मिल कर उसकी बहन को प्रताड़ित करता था। उसने न सिर्फ़ पीड़िता और उसके दो बच्चों को बंधक बनाया बल्कि 4 दिनों तक खाना-पीना भी नहीं दिया।
तीन तलाक को अपराध बनाने वाले ऐतिहासिक बिल के अमल में आने के बाद इस तरह की यह दूसरी घटना है। इससे पहले सहारनपुर में मोहम्मद अली ने कानून के डर से अपनी पत्नी को अपना लिया था।
फातिमा के ससुर ने उसकी तराबुद्दीन से फोन पर बात करवाई। जैसे ही फातिमा ने हैलो कहा, तराबुद्दीन ने तलाक तलाक तलाक कहकर फोन काट दिया। इसके बाद ससुर ने पंचायत बुलाकर फातिमा को डेढ़ लाख रुपए का चेक दे रिश्ता खत्म करने का एलान कर दिया।