"मेरे शौहर मुदस्सिर बेग ने मुझे 17 जुलाई को 100 रुपए का स्टाम्प पेपर भिजवाया। जिस पर तलाक-ए-बाईन छपा है। उस पर लिखा था कि मैं तंग आ चुका हूँ। अपना रिश्ता यहीं खत्म करता हूँ। तुम भी आगे की जिंदगी अपने तरीके से जी सकती हो। यह पहला तलाक है। दो और भेज दूँगा।"
अभी तक इस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़िता इंसाफ़ के लिए दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि पुलिस द्वारा उनके मामले को दहेज प्रताड़ना में दर्ज किया गया है जबकि कार्रवाई तीन तलाक पर होनी चाहिए।
बिल के मुताबिक, मुकदमे का फैसला होने तक बच्चा माँ के संरक्षण में ही रहेगा। आरोपित को उसका भी गुजारा देना होगा। तीन तलाक का अपराध सिर्फ तभी संज्ञेय होगा जब पीड़ित पत्नी या उसके परिवार (मायके या ससुराल) के सदस्य एफआईआर दर्ज कराएँ।
गुलशनजहाँ को जब तीसरी बेटी पैदा हुई, तो बौखलाए ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। फिर 20 जुलाई को उसके शौहर ने तीन तलाक देकर उससे सारे संबंध खत्म करते हुए दूधमुँही बच्ची के साथ घर से निकाल दिया।
शौहर मुनीर ने राबिया को तीन तलाक दे दिया। फिर उस पर हलाला का दबाव बनाने लगा। जब राबिया राजी नहीं हुई तो शौहर राबिया से होटल में मिलता रहा और शारीरिक संबंध बनाता रहा। इस दौरान वह 2 बार गर्भवती हुई तो गर्भपात भी कराया।
2 महीने पहले पति ने अपनी बीवी से मारपीट की और उसे घर से निकाल दिया। फिर 7 जुलाई को उसने तीन तलाक भी दे दिया। ठीक 14 दिन के बाद अचानक से ससुराल पहुँच बीवी को अपनाने की बात कही लेकिन अपने छोटे भाई के साथ हलाला करवाने के बाद!
रुखसाना ने अपने पिता को बताया कि उसके पति व ससुराल के अन्य परिजन दहेज के लिए उसे परेशान कर रहे हैं। जब कुतुबुद्दीन ने अपना दामाद शाहे आलम को समझाना शुरू किया तो उन्हें भी जान से मारने की धमकी दी गई।
"मेरे दामाद अब्बास के किसी और से अवैध संबंध थे। डेढ़ साल पहले उसने पूरे परिवार की मिलीभगत से मेरी बेटी आरिफा को तलाक दे दिया। फिर आश्वासन दिया कि वह आरिफा का हलाला करवाकर दोबारा अब्बास से निकाह करवा देंगे। 2 दिन पहले उसे मार दिया।"