प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- "समानो मंत्र: समिति: समानी। समानम् मनः सह चित्तम् एषाम्।" इसका अर्थ है कि हमारे विचार, हमारे संकल्प और हमारे हृदय एकजुट होने चाहिए। उन्होंने '9 बजे 9 मिनट' के तहत रविवार की रात लोगों द्वारा दिए और कैंडल जलाने की बात करते हुए इसे सफल बताया।
अमेरिका कोरोना वायरस संक्रमण से हो रही मौतों के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है। वहॉं अब 3 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 8,452 लोगों की जान भी जा चुकी है।
प्रार्थना पुरुषार्थ का स्थगन नहीं है और यही वजह है कि प्रार्थना में कुछ भी अवैज्ञानिक नहीं है। Covid-19 को रोकने के सभी प्रयास हमारी शुभकामनाओं से बल पाएँगे और हमें निर्धारित निर्देशों का पालन करने की प्रेरणा देंगे। दवा हमारे शरीर की और दुआ हमारे मन की इम्यूनिटी को बढ़ाती है।
"आपको होने वाली असुविधा और कठिनाई के लिए मैं क्षमा माँगता हूँ। बीमारी और उसके प्रकोप से शुरुआत में ही निपटना पड़ता है, नहीं तो बाद में यह असाध्य हो जाता है। भारत आज यही कर रहा है।"
"मैं कौन होता हूँ चैरिटी या डोनेट करने वाला? दूसरी बात ये कि हम अपने देश को भारत माता कहते हैं। मेरा ये योगदान असल में मेरा नहीं है। ये मेरी माँ की तरफ से भारत माता के लिए है।"
कई लोगों ने इस भीड़ को देख कर नोटबंदी के बाद बैंकों में लगी भीड़ को याद किया। मेरठ ही नहीं बल्कि अलीगढ़ में भी भीड़ जुटी। एक बैंक के अधिकारी ने बताया कि अफरातफरी के माहौल के कारण लोग 100 रुपए भी निकाल के ले जा रहे हैं।
पीएम मोदी से नर्स छाया ने कहा कि वो देवता की तरह हैं और दुनिया के सभी देशों को उनके जैसा प्रधानमंत्री मिले। पीएम मोदी ने छाया को उनकी भावनाओं के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वो जो भी कर रहे हैं, वो उनका कर्तव्य है। पीएम ने वुहान से लौटे एक कश्मीरी मेडिकल छात्र से भी बातचीत की।
"आज लॉकडाउन की परिस्थिति में काशी देश को सिखा सकती है- संयम, समन्वय, संवेदनशीलता। काशी देश को सिखा सकती है- सहयोग, शांति, सहनशीलता। काशी देश को सिखा सकती है- साधना, सेवा, समाधान।"
कोरोना से बचने का इसके अलावा कोई तरीका नहीं है, कोई रास्ता नहीं है। बकौल पीएम, कोरोना को फैलने से रोकना है, तो इसके संक्रमण की सायकिल को तोड़ना ही होगा।