कोरोना पर सार्क देशों के साथ चर्चा में पीएम मोदी ने इस वायरस के फैलने को लेकर भारत के अनुभव के बारे में बताते हुए कहा कि 'तैयार रहें, लेकिन घबराएँ नहीं' ही हमारे मार्गदर्शन का मंत्र है।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा की है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी जी-20 के बीच लिंक-अप को बढ़ावा देते हुए कोरोना के खतरे से निपटने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने कहा कि ये काफ़ी सराहनीय है।
सार्क में भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान, नेपाल और अफगानिस्तान शामिल हैं। शुक्रवार को प्रधानमंत्री ने विडियो कॉन्फ्रेंस का प्रस्ताव दिया था। इसको लेकर सार्क देशों ने भी सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई थी।
पीएम मोदी ने अपनी वर्ल्ड लीडर की छवि के अनुसार, दक्षिण एशियाई देशों के संगठन दक्षेस (SAARC) में शामिल देशों से आह्वान किया है कि सभी आठ राष्ट्राध्यक्ष विडियो कॉन्फ्रेसिंग से जुड़कर कोरोना के खिलाफ एकजुट लड़ाई पर चर्चा करें।
पीएम मोदी के सोशल मीडिया अकाउंट से विदा लेने के बाद सबसे पहला ट्वीट स्नेहा मोहनदास का आया। उन्होंने लिखा- मैं स्नेहा मोहनदास हूँ। अपनी माँ से प्रेरित होकर, जिन्होंने बेघरों को खाना खिलाने की आदत डाली, मैंने फूडबैंक इंडिया नाम से पहल शुरू की है।
दीपा ने कहा कि उन्होंने भगवान को तो नहीं देखा है, लेकिन मोदी को देखा है। उनके अनुसार पहले जब वो दवाएँ खरीदती थीं तो 5000 रुपए से भी अधिक ख़र्च हो जाते थे। अब मात्र 1500 रुपए प्रतिमाह में उनकी दवाओं का ख़र्च निकल आता है।
कॉर्पोरेट टैक्स की ओर ध्यान दिलाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत उन प्रमुख देशों में शामिल है जहाँ कोर्पोरेट टैक्स सबसे कम है इसी कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
पीएम मोदी ने लोगों से भी सावधानी बरतने की अपील की है। एक जगह ज्यादा लोगों के मिलने-जुलने या पार्टी वाला माहौल होने से COVID-19 के फैलने का ख़तरा ज़्यादा है, ऐसा दुनिया भर के विशेषज्ञों ने बताया है।
अटकलों का बाजार गर्म हो गया था और सभी इस सवाल के जवाब को तलाशने में लग गए थे कि आख़िर प्रधानमंत्री सोशल मीडिया को क्यों अलविदा कहना चाहते हैं? अब उन्होंने इस बात का जवाब दे दिया है। पीएम मोदी की उस घोषणा के पीछे का राज उन्होंने ख़ुद खोला है।