राफेल डील के सवाल पर राहुल गाँधी ने कहा कि पीएम मोदी ने सभी नियमों को अनदेखा कर अनिल अंबानी को फायदा पहुँचाया है, जिसकी जाँच होनी चाहिए। कॉन्ग्रेस पार्टी शुरू से ही इसकी जाँच की माँग कर रही है।
न्यायालय ने आयोग से कहा था कि पहले वह फिल्म को देखे फिर उसकी रिलीज़ पर निर्णय ले। निर्वाचन आयोग ने फिल्म को देखने के बाद अपने विचार न्यायालय के सामने रखे थे जिसके बाद न्यायालय ने आयोग के निर्णय को बरक़रार रखा था।
पंडित नेहरू जब प्रधानमंत्री थे। तब कुम्भ में भगदड़ मच गई थी। हजारों लोग कुचल के मारे गए थे। लेकिन सरकार की लाज बचाने के लिए, पंडित नेहरू पर कोई दाग न लग जाए, इसके लिए खबरें दबा दी गईं। कुछ अखबारों में कोने में खबर छिपा दी गई। इसमें पीड़ितों को भी कुछ नहीं दिया गया। ऐसा पाप देश के पहले प्रधानमंत्री के काल में हुआ।
आयोग की ओर से जारी किए गए नोटिस में तेज बहादुर को निर्देश दिए गए हैं कि वह बीएसएफ से एक अनापत्ति प्रमाण पत्र लेकर आएँ, जिसमें यह स्पष्ट हो कि उन्हें नौकरी से किस वजह से बर्खास्त किया गया। निर्वाचन आयोग ने इस प्रमाण पत्र को जमा करने के लिए बुधवार (मई 1, 2019) को दोपहर 11 बजे तक का वक्त दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वापसी के बारे में चीनी मीडिया और विशेषज्ञ क्या सोचते हैं? राहुल गाँधी के बारे में क्या है चीन में चर्चा? चीन को भरोसा है कि मोदी वापस लौटेंगे और वहाँ की मीडिया में 'डिजिटल इंडिया' जैसी भारतीय योजनाओं के साथ-साथ मोदी की वैश्विक कूटनीति की भी चर्चा है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 23 सीटें जीतने की बात कही है। बंगाल में लगातार पाँव जमा रही भाजपा ने दशकों तक राज करने वाले वामपंथी दलों को आसानी से तीसरे स्थान पर ढकेल दिया है। मोदी ने बंगाल के लोगों को 'मिशन महामिलावट' के प्रति आगाह करते हुए कहा कि कुछ दल केंद्र में एक खिचड़ी सरकार चाहते हैं।
"मैं जेल में हूँ। वाराणसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ना चाहता हूँ। इसके लिए मैंने नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया है। मगर जेल में रहकर चुनाव प्रचार नहीं कर सकता। इसलिए चुनाव प्रचार करने के लिए मुझे तीन सप्ताह के लिए जमानत पर रिहा किया जाए।"
पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा, "हमारे देश में ऐसे बुद्धिमान और तेजस्वी लोग हैं, जो आलू से सोना बनाते हैं। वो काम हम नहीं कर सकते, न मेरी पार्टी कर सकती। जिसको आलू से सोना बनाना है, वो उनके पास जाये, हम ऐसा नहीं कर सकते।"
2019 के लोकसभा चुनावों के रुझानों से पता चलता है कि एनडीए सरकार सत्ता में वापस आ रही है, कॉन्ग्रेस समर्थित मीडिया पारिस्थितिकी तंत्र नरेंद्र मोदी के साथ तालमेल बिठाने का मौका खोजने की कोशिश में अपने पुराने आकाओं गिरोहों को छोड़ने का यह एक संकेत है। या इस बात का डर कि अब और कॉन्ग्रेसी या देश विरोधी एजेंडा चलाना संभव नहीं।