विपक्षी दलों ने मतगणना के समय किसी भी मतदान केंद्र पर गड़बड़ी पाए जाने की स्थिति में देशभर में सभी विधानसभा क्षेत्रों में EVM के आँकड़ों के साथ VVPAT मशीन की पर्चियों से मिलान की माँग की थी।
एग्जिट पोल को ‘गप’ करार देने से शुरू हुआ विपक्ष का स्तर अब खुलेआम हिंसा करने और खून बहाने तक आ गया है। उपेंद्र कुशवाहा ने मतदान परिणाम मनमुताबिक न होने पर सड़कों पर खून बहा देने की धमकी दी है। इस संभावित हिंसा का ठीकरा वे नीतीश और केंद्र की मोदी सरकार के सर भी फोड़ा है।
शरद पवार ने चंद्रबाबू नायडू से बैठक के दौरान उन्हें झटका दिया। नायडू ने राहुल गाँधी, सीताराम येचुरी, अरविन्द केजरीवाल और अभिसेक सिंघवी से मुलाक़ात की है। वह सोनिया और ममता से भी मिलेंगे।उधर मायावती ने सोनिया गाँधी से मुलाक़ात रद्द कर दी है।
कॉन्ग्रेस भी तीसरे मोर्चे की सरकार बनाने के लिए विपक्ष की पार्टियों को एकजुट करने में जुट गई है। इसके लिए कॉन्ग्रेस ने नेताओं से मिलने की क़वायद भी शुरू कर दी है। शुक्रवार (17 मई) को कॉन्ग्रेस ने कहा था कि वो एक प्रगतिशील और धर्मनिरपेक्ष सरकार के गठन के लिए प्रतिबद्ध है।
ऐसे में, इस सीट को लेकर अभी तक संशय बना हुआ है। वाराणसी से ख़ुद पीएम मोदी मैदान में हैं और काशी से सटी गाज़ीपुर सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मनोज सिन्हा की लोकप्रियता में बढ़ोतरी हुई है।
दोनों प्रमुख द्रविड़ नेताओं की मृत्यु, लालू के जेल में होने, मुलायम को बेटे द्वारा किनारे किए जाने, शरद पवार के चुनाव लड़ने से इनकार करने, नायडू-पटनायक के अपने गढ़ बचाने में व्यस्त रहने और कॉन्ग्रेस की मज़बूरी के कारण केसीआर एक बड़े विपक्षी सूत्रधार बन कर उभरना चाह रहे हैं।
सुल्तानपुर के पुलिस अधीक्षक अनुराग वत्स ने कहा कि रात में घटना की सूचना मिली है। मेनका समर्थक शिवकुमार सिंह के साथ प्रचार में लगे लोगों के साथ चंद्रभद्र सिंह के समर्थकों ने मारपीट की, जिसमें मेनका गाँधी के समर्थकों को काफी चोटें आईं हैं। मामले की जाँच करवाई जा रही है।
पिछले साल रवीश कुमार द्वारा संचालित एक कार्यक्रम में, सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा था कि उन्हें उस पत्रकार की हत्या नहीं करने का पछतावा है जिसने उनकी आलोचना की थी। रवीश कुमार ने अखिलेश यादव की सहनशीलता की प्रशंसा करते हुए उस शो की शुरुआत की थी।
जमीन पर मतदाताओं तक महागठबंधन की खबर पहुँचा पाने में बसपा कार्यकर्ता विफल रहे हैं। एक बड़ा मतदाता वर्ग हाथी न ढूँढ़ पाने के भ्रम में कमल का बटन दबा आ रहे हैं।
संभल के एसडीएम दीपेंद्र यादव ने इस मामले को गंभीर बताया। साथ ही बर्क के बयान वाली वीडियो का भी परीक्षण हुआ। प्रमाणिकता की पुष्टि होने के बाद उन्हें नोटिस जारी किया गया