Friday, November 27, 2020
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‘हत्या करवा दूँगा, लाश कुत्ते खाएँगे’: आजतक के संपादक की प्रताड़ना से तंग पत्रकार, संपादक ने कहा – ‘सभी आरोप निराधार’

"साले तुम कीड़े-मकोड़े हो। मुझको जो मन आएगा करूँगा... तेरी क्या औकात है। साले तुझको सड़क पर ला दूँगा और तेरे परिवार को बर्बाद कर दूँगा। अगर सुधरा नहीं, तो साले तुझको जूतों से मारूँगा और तेरी हत्या करवा दूँगा। तेरी लाश को कुत्ते खाएँगे। तुझको न मोदी बचाने आएगा और न बीजेपी।"

“साले तुम कीड़े-मकोड़े हो। मुझको जो मन आएगा करूँगा। मैं गधों को बड़ी जिम्मेदारी दूँगा और उनका प्रमोशन करूँगा व अप्रेजल करूँगा, क्योंकि वो मेरी विचारधारा के लोग हैं। तेरी क्या औकात है। साले तुझको सड़क पर ला दूँगा और तेरे परिवार को बर्बाद कर दूँगा। अगर सुधरा नहीं, तो साले तुझको जूतों से मारूँगा और तेरी हत्या करवा दूँगा। तेरी लाश को कुत्ते खाएँगे। तुझको न मोदी बचाने आएगा और न बीजेपी।”

उक्त कथन एक नामी मीडिया संस्थान के संपादक का है। माफ करिए! सिर्फ़ संपादक का नहीं, एक वामपंथी संपादक का है। इस वामपंथी संपादक का नाम पाणिनि आनंद है। आजतक के एक पत्रकार राम कृष्ण का आरोप है कि एक दिन उन्होंने रात के वक़्त पाणिनि आनंद को कॉल कर कहा कि वे काम करना चाहते हैं, उन्हें क्यों व्हॉट्स एप ग्रुप से निकाला जा रहा है? तब आनंद ने उन्हें धमकाते हुए उपरोक्त बातें कही। राम कृष्ण की गलती सिर्फ़ इतनी थी कि वह अपनी मेहनत के मुताबिक कुछ समय से अप्रेजल माँग रहे थे और पाणिनि आनंद के कहने पर भी मोदी सरकार के विरोध में सोशल मीडिया पर कुछ नहीं लिखते थे।

राम कृष्ण aajtak.in में साल 2017 से कार्यरत हैं। हाल में उन्होंने पीएमओ को पत्र लिख कर अपना दर्द साझा किया है। रामकृष्ण ने ऑपइंडिया को बताया कि उनके पहले के संपादक कभी भी इस तरह का बर्ताव नहीं करते थे। काम करने का माहौल भी अच्छा था। सब बेहिचक खबरें लिखते थे।

मगर, पाणिनि आनंद के कमान सॅंभालने के बाद पूरा माहौल बदल गया। पत्रकारों से जबरदस्ती मोदी सरकार के विरोध में लिखने को कहा जाने लगा। जिन्होंने लिखा वह तो आनंद के करीबी बने रहे। लेकिन जिन्होंने ऐसा करने से मना किया, उन्हें कुछ ही समय में दुत्कारा जाने लगा। स्वयं राम कृष्ण को भी कई बार भगवाधारी कहा गया, लेकिन उन्होंने दावा किया कि भले ही उनकी विचारधारा किसी एक पार्टी के करीब दिखती हो, लेकिन उन्होंने अपने काम में, अपनी खबर में इसे कभी झलकने नहीं दिया।

19 अप्रैल को जब भोजन खत्म हो गया और पैसा नहीं रहा, तब पाणिनि आनंद को किए गए मेल का स्क्रीनशॉट (साभार: भड़ास फॉर मीडिया)

पत्रकार राम कृष्ण कहते हैं कि शुरू में तो बाकियों की तरह वह भी अपनी नौकरी बचाने के लिए सबकुछ नजरंदाज करके काम करते रहे। आनंद के बुलाने पर उनके घर की पार्टियों में भी गए। किंतु कुछ समय में उन्हें अपने संपादक के इस बर्ताव से दिक्कत होने लगी और उन्होंने पार्टियों में जाने से व मोदी विरोध में बोलने से साफ मना कर दिया। इसके बाद उन्हें दरकिनार करने का सिलसिला शुरू हुआ और उनकी सैलरी व प्रमोशन भी रोक दी गई।।

पीड़ित पत्रकार की मानें तो वह शराब को हाथ तक नहीं लगाते थे, लेकिन अपनी नौकरी बचाने के लिए उन्होंने शराब का भी दो बार सेवन किया। ऐसा सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उनसे गाली-गलौच की जाने लगी थी।

राम कृष्ण के अनुसार, पाणिनि आनंद अपने चहेते कर्मचारियों को घर पर बुला कर पार्टी देते हैं और कई काम भी करवाते हैं। एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने ऑपइंडिया को बताया कि उनके एक साथी को ऐसी ही पार्टी में संपादक के चहेतों ने पीटा था। लेकिन आनंद तब भी चुप रहे।

पत्रकार राम कृष्ण का आरोप हैं कि पाणिनि आनंद और विजय रावत मोदी सरकार के ख़िलाफ़ अपना एजेंडा चलाने के लिए कर्मचारियों को उकसाते हैं। उन्हें वेबसाइट पर नहीं तो, सोशल मीडिया पर लिखने को बोलते हैं। कई बार फर्जी आईडी बना-बना कर ऐसे प्रोपेगेंडा चलाने की सलाह तक दी गई थी। मगर, जब इन सबके विरोध में किसी ने आवाज उठाई तो उसकी नौकरी छीन ली गई और उसका जीना दुश्वार कर दिया गया।

पत्रकार के अनुसार, पाणिनि आनंद और विजय रावत के लिए उनकी विचारधारा से अलग लोगों के साथ गाली-गलौच करना आम बात है। लड़के से लेकर लड़कियों तक के लिए वह अप्रेजल का क्राइटेरिया एक ही रखते हैं। यानी, जो उनकी बात मानेगा, उनकी विचारधारा को स्वीकारेगा, वही प्रमोशन लेकर आगे बढ़ेगा। उनका इस बात से कोई सरोकार नहीं होता कि कोई दूसरी विचारधारा का पत्रकार कैसा काम कर रहा है। कितनी मेहनत कर रहा है।

एक सहयोगी का जिक्र करते हुए आजतक के पत्रकार हमें बताते हैं कि कुछ समय पहले उनकी एक साथी की तबीयत बिगड़ी तो उन्होंने संस्थान में छुट्टी के लिए कहा। लेकिन तब किसी ने कॉपरेट नहीं किया। बाद में मालूम चला कि उन्हें कोरोना था, जिसके कारण उनकी मृत्यु हो गई। अपनी साथी की स्थिति साझा करते हुए रामकृष्ण दुख व्यक्त करते हैं। साथ ही बताते हैं उस पत्रकार ने मौत से कुछ दिन पहले तक भी काम किया था।

राम कृष्ण ने बताया कि एक बार उनका अप्रेजल और प्रमोशन जब सब रोक दिया गया तो उन्होंने दूसरे संस्थान में नौकरी ढूँढी। उनका दो बार अन्य संस्थानों में सिलेक्शन भी हुआ। लेकिन तब पाणिनि आनंद ने उन्हें बुलाकर कहा,” संस्थान को धोखा देंगे क्या। अभी चुनाव का मामला है कुछ दिन बाद हम आपका अप्रेजल कर देंगे।” इसके बाद काफी समय बीता, लेकिन सैलरी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। जब उन्होंने दोबारा पूछा तो जवाब मिला कि जब तक आप विजय रावत (सीनियर असिस्टेंट एडिटर) को खुश नहीं करोगे तो कैसे होगा?

आजतक डॉट इन में राम कृष्ण सीनियर सब एडिटर के तौर पर जिम्मेदारी सॅंभालते हैं। उनसे 17-18 घंटे तक काम करवाया जा चुका है। वह आरोप लगाते हैं कि संस्थान में जो कोई भी संपादक और सीनियर असिस्टेंट एडिटर की विचारधारा से मेल नहीं खाता, उसे तरह-तरह से परेशान किया जाता है। जैसे उससे शिफ्ट में अधिक काम लेना, उससे 20-20 की खबरें बनवाना, उस पर दबाव डालना, गाली-गलौच करना आदि।

पत्रकार की मानें तो उनको लॉकडाउन के समय में कुछ ज्यादा ही प्रताड़ित किया जाना शुरू हुआ। जब बात वर्क फ्रॉम होम की आई तो उनको लैपटॉप तक मुहैया नहीं कराया गया। उन्होंने नौकरी को बचाने के लिए अपने किसी दोस्त से लैपटॉप माँगा। वहीं, जो संपादक की विचारधारा के लोग थे उन्हें सारी सुविधा दी गई।

राम कृष्ण बताते हैं कि पोर्टल के लिए अपनी विचारधारा वाले लोगों की भर्ती भी इन्होंने शुरू कर दी है। अब टीम में 20-30% लोग उनके जैसे आ चुके हैं। वह लोग ये खुलेआम बोलते हैं कि जिसको दिक्कत है वो जाए ताकि वह वहाँ अपने साथियों को भर्ती करें, जिनके पास अभी नौकरी नहीं है।

राहुल कंवल और गौरव सावंत के साथ राम कृष्ण की तस्वीर

यहाँ बता दें, अपनी इन शिकायतों को लेकर राम कृष्ण ने पीएमओ तक को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने उक्त बातों में से अधिकांश बातों का जिक्र लिखित रूप से किया है। उन्होंने बताया है कि वह अपने संस्थान के वरिष्ठों (राहुल कंवल जैसे लोगों) से कई बार इन सब की शिकायत कर चुके हैं। लेकिन किसी ने कभी कुछ नहीं बोला।

अब उनका मानना है कि पाणिनि आनंद और विजय रावत उन्हें पागल घोषित करवाना चाहते हैं व उनकी हत्या भी करवा सकते हैं। इससे उनका परिवार दहशत में हैं। राम कृष्ण की शादी कुछ समय पहले हुई थी और अप्रैल में उनका बच्चा भी हुआ है। ऐसे में उन्हें नौकरी और पैसों की बहुत जरूरत है। उन पर पैसों की किल्लत के कारण कर्जा भी बढ़ गया है।

आजतक पर राम कृष्ण की कई खबरें मौजूद हैं

मगर, तब भी यह लोग उनके लिए कई परेशानी खड़ी कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्हें व्हॉट्सएप ग्रुप से निकाला गया, जब उन्होंने सवाल पूछे और अपनी मजबूरी बता कर मदद की अपेक्षा की तो उनसे गाली-गलौच हुआ। साथ ही कहा गया, “तुम कीड़े-मकोड़े हो, मेरे साथ 72 कीड़े-मकोड़े काम करते हैं, जब चाहे जिसे मसल कर फेंक दूँ, कोई मेरा कुछ नहीं कर सकता। यहाँ न मालकिन की चलती है और न एचआर की।” इसके बाद उन्हें एक और ग्रुप से निकाला गया और उनकी आईडी को डिसेबल किया गया, जिससे वह काम करते थे।

उन्होंने इस बाबत कई शिकायतें की, पर जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो अब अंत में उन्होंने बहुत परेशान होकर पीएमओ को पत्र लिखा। उनका कहना है कि आगे वह समय आने पर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाने को भी तैयार हैं। वह दावा करते हैं कि कोई भी उनकी पत्रकार होने की दक्षता पर सवाल नहीं उठा सकता। वह पाणिनि आनंद समेत उनके सभी के चहेतों के साथ, जिनका अप्रेजल 25-30 % किया गया, टेस्ट देने को तैयार हैं।

अगर उनकी लेखनी या काबिलियत में कमी पाई जाती है तो वह पत्रकारिता से संन्यास लेने को भी तैयार हैं। वह दावा करते हैं कि उनके साथ काम करने वाले 70 प्रतिशत लोग उनकी बातों से सहमत हैं, लेकिन रोजी-रोटी के लिए सामने नहीं आ सकते। आने वाले समय में जब भी नौकरी के अवसर दोबारा शुरू होंगे तो 30-40 प्रतिशत लोग इस्तीफा देंगे। बता दें, इस मामले में खबर है कि पीएमओ ने मामले की जाँच शुरू करा दी है। नोएडा में डीसीपी स्तर के एक अधिकारी द्वारा इस मामले की जाँच की जा रही है।

नीचे हम आजतक के पत्रकार राम कृष्ण के उस पत्र को जस का तस आपसे साझा कर रहे हैं जो उन्होंने त्रस्त होकर पीएम को लिखा:

आजतक (इंडिया टुडे ग्रुप) के पत्रकार का आदरणीय PM जी के नाम खत

हिंदुस्तान के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार देश को आत्मनिर्भर बनाने और आगे बढ़ाने के लिए दिनरात कड़ी मेहनत कर रहे हैं। दुनिया के शीर्ष नेता पीएम मोदी जी की लगन और मेहनत का ही नतीजा है कि हिंदुस्तान तेजी से आगे बढ़ रहा है और भ्रष्टाचार मुक्त है। हालाँकि तथाकथित बुद्धिजीवी वामपंथियों को यह बर्दाश्त नहीं हो रहा है और ये लोग केंद्र की मोदी सरकार, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और दूसरे राज्यों की बीजेपी सरकार को अस्थिर करने की साजिश रच रहे हैं। इसके लिए ये वामपंथी प्रोपेगैंडा चला रहे हैं और मीडिया संस्थानों पर कब्जा कर रहे हैं।
बीजेपी, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री श्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मु्ख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, श्री संबित पात्रा, श्री जेपी नड्डा समेत बीजेपी के अन्य नेताओं और आरएसएस के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करने और प्रोपेगैंडा नहीं चलाने पर ईमानदार पत्रकारों पर अत्याचार किया जा रहा है और धमकी दी जा रही है। साथ ही इस्तीफा देने का गैरकानूनी तरीके से दबाव बनाया जा रहा है। पिछले कुछ समय से मैं राम कृष्ण भी इसका शिकार हो रहा हूँ। वामपंथी संपादक लॉकडाउन में मजबूरी का फायदा उठा रहे हैं।
मैं 9 अगस्त 2017 से aajtak.in में बतौर पत्रकार काम कर रहा हूँ। मैंने साल 2013 में अमर उजाला से पत्रकारिता के कैरियर की शुरुआत की थी। Aajtak.in के संपादक पाणिनि आनंद और विजय रावत अपनी वामपंथी विचारधारा के लोगों के साथ मिलकर बीजेपी, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री श्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मु्ख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, श्री संबित पात्रा, श्री जेपी नड्डा समेत बीजेपी के अन्य नेताओं और आरएसएस के सरसंघचालक श्री मोहन भागवत के खिलाफ प्रोपेगैंडा चला रहे हैं।
इसके लिए पाणिनि आनंद और विजय रावत Aajtak.in, इंडिया टुडे ग्रुप और सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं। साथ ही केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार समेत कई राज्यों की बीजेपी सरकारों को गिराने की साजिश रच रहे हैं। इसके लिए पाणिनि आनंद अपने घर में भी आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों, नक्सलियों और बीजेपी विरोधियों को जुटाते हैं और साजिश रचते हैं।
पाणिनि आनंद और विजय रावत अक्सर अपनी विचारधारा के लोगों से कहते हैं कि हम Aajtak.in और इंडिया टुडे ग्रुप को छोड़कर मोदी और बीजेपी के खिलाफ कुछ नहीं कर पाएँगे। इसलिए संस्थान में बने रहना और अपने लोगों की भर्ती करनी जरूरी है। अगर इंडिया टुडे ग्रुप में हमारी विचारधारा और हमारे करीबियों की संख्या बढ़ जाए, तो हम संस्थान को अपने मुताबिक चला लेंगे। चुनाव के दौरान मोदी विरोधी और बीजेपी विरोधी अभियान को तेज कर देंगे। इस काम के लिए Aajtak.in में बने रहना जरूरी है।
पाणिनि आनंद और विजय रावत की प्लानिंग
एक बार पाणिनि आनंद ने टीम की मीटिंग के दौरान अपनी विचारधारा के लोगों से कहा था, ‘इंडिया टुडे ग्रुप मुझको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ लिखने और बोलने से रोक रहा है। इंडिया टुडे ग्रुप अब मोदी टुडे ग्रुप बन गया है। लिहाजा हम लोगों के लिए यह बेहतर होगा कि हम शहीद होने की बजाय संस्थान में बने रहें और धीरे-धीरे अपनी विचारधारा को आगे बढ़ाएँ। अपने करीबियों और विचारधारा के लोगों की भर्तियां करें। इस तरह Aajtak.in समेत पूरे इंडिया टुडे ग्रुप में हमारी पकड़ मजबूत होगी और फिर हम जो चाहेंगे, वो कर सकेंगे’।
पाणिनि आनंद के ये शब्द आज भी मेरे कान में गूँज रहे हैं। पाणिनि आनंद और विजय रावत का कहना है कि Aajtak.in में सिर्फ उन लोगों को प्रमोट किया जाए और आगे बढ़ाया जाए, जो हमारे करीबी हैं। जो पीएम मोदी और बीजेपी के खिलाफ सोशल मीडिया समेत हर जगह प्रोपेगैंडा चलाना चाहते हों। अगर टीम का कोई सदस्य हमारे खिलाफ जाए, तो उसको बाहर का रास्ता दिखाया जाए और काम छीन लिया जाए। साथ ही उसका प्रमोशन व अप्रेजल रोक दिया जाए और एचआर डिपार्टमेंट से मिलकर ऐसे लोगों को जबरन सस्पेंड और टर्मिनेट करा दिया जाए।
पाणिनि आनंद और विजय रावत, Aajtak.in टीम के कई सदस्यों के साथ ऐसा बर्ताव कर चुके हैं। अब मुझको भी धमकी दी है। इनके डर से Aajtak.in टीम के एक भी सदस्य मोदी सरकार के अच्छे कामों की भी तारीफ नहीं कर पाते हैं। अगर पाणिनि आनंद, विजय रावत और इनकी विचारधारा के लोगों की साजिश के खिलाफ कोई आवाज उठाता है, तो उसको पाणिनि आनंद और विजय रावत कुचल देते हैं। उसकी नौकरी खा जाते हैं और उसका जीना दुश्वार कर देते हैं।
पाणिनि आनंद, विजय रावत और इनके लोग मिलकर टॉर्चर और दुर्व्यवहार भी करते हैं। ईमानदार पत्रकारों के साथ गाली गलौज करना और धमकी देना इनके लिए आम बात है। पाणिनि आनंद और विजय रावत, टीम के पुराने काबिल पत्रकारों को गैरकानूनी तरीके से बाहर निकालकर अपनी विचारधारा के लोगों की टीम में भर्ती भी कर चुके हैं। यह सिलसिला लगातार जारी है।

क्यों मेरी हत्या कराना चाहते हैं पाणिनि आनंद और विजय रावत?
पाणिनि आनंद और विजय रावत मुझ पर बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बीजेपी के अन्य नेताओं के खिलाफ प्रोपेगैंडा चलाने का दबाव बना रहे हैं। मुझको सोशल मीडिया पर इन नेताओं और बीजेपी के खिलाफ पोस्ट करने को कह रहे हैं। ऐसा नहीं करने पर पत्रकारिता से कैरियर खत्म करने की धमकी दे रहे हैं।
सोशल मीडिया पर पीएम मोदी और बीजेपी की तारीफ करने पर पाणिनि आनंद ने फोन पर मुझको धमकी दी और गाली गलौज किया। पाणिनि आनंद ने फोन पर मुझको धमकी देते हुए कहा, “साले तुम कीड़े-मकोड़े हो। मुझको जो मन आएगा करूँगा। मैं गधों को बड़ी जिम्मेदारी दूंगा और उनका प्रमोशन करूंगा व अप्रेजल करूँगा, क्योंकि वो मेरी विचारधारा के लोग हैं। तेरी क्या औकात है। साले तुझको सड़क पर ला दूँगा और तेरे परिवार को बर्बाद कर दूँगा। अगर सुधरा नहीं, तो साले तुझको जूतों से मारूँगा और तेरी हत्या करवा दूँगा। तेरी लाश को कुत्ते खाएँगे। तुझको न मोदी बचाने आएगा और न बीजेपी।”
पाणिनि आनंद की इस धमकी के बाद से मैं और मेरा परिवार दहशत में है। मुझको डर है कि पाणिनि आनंद और विजय रावत और इनके लोग मुझ पर हमला कर सकते हैं और मेरी हत्या करवा सकते हैं। ये लोग मेरे परिवार को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं। पाणिनि आनंद और विजय रावत ने मुझको पागल घोषित कराने की भी धमकी दी है, ताकि मैं अपने अधिकारों की लड़ाई भी न लड़ सकूँ।

आजतक वेबसाइट के संपादक पाणिनि आनंद की बात

इस लेख में रामकृष्ण की ओर से लगाए गए सभी आरोप निराधार, अनर्गल और अप्रत्याशित हैं और इनमें कोई सच्चाई नहीं है। रामकृष्ण को अनुशासनहीनता और कामकाज में लापरवाही के चलते संस्थान द्वारा 10 अगस्त, 2020 को बर्खास्त किया जा चुका है। ऐसा किए जाने में संस्थान की ओर से पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया है। रामकृष्ण द्वारा प्रचारित बातें केवल संस्थान और संपादक के प्रति दुष्प्रचार और दुर्भावना को ही प्रकट करती हैं। संपादक की ओर से रामकृष्ण को प्रोत्साहन और मदद के अलावा कुछ नहीं दिया गया। इस प्रकार के निराधार आरोप दुर्भाग्यपूर्ण हैं।

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