जिस धर्म के हजारों बड़े मंदिर तोड़ दिए गए, उनकी आस्था पर सिर्फ इस मकसद से हमला किया गया कि ये टूट जाएँ और यह विश्वास करने लगें कि उनका भगवान भी स्वयं के घर की रक्षा नहीं कर पा रहा, उस धर्म के लोग जब अपनी आस्था को पहचानने को खड़े हुए हैं तो उन्हें स्कूल और हॉस्पिटल की याद दिलाई जा रही है?
हाजी महबूब बाबरी मस्जिद के पैराकार हैं। इनका कहना है - "अब फ़ैसला आना तय है और इस मामले पर बहुतों ने बहुत कुछ बनाया, लेकिन मुझे पुरखों की ज़मीन से 9 बीघे ज़मीन इस केस के लिए बेचनी पड़ गई।"
1528-1731 के बीच विवादित स्थल पर कब्जे को लेकर दोनों सम्प्रदायों के बीच 64 बार संघर्ष हुए। 1822 में फैजाबाद अदालत के मुलाजिम हफीजुल्ला ने सरकार को भेजी एक रिपोर्ट में कहा कि राम के जन्मस्थान पर बाबर ने मस्जिद बनवाई।
"वे कौन होते हैं सद्भावना के नाम पर पेशकश करने वाले? क्या मुस्लिम जनसंख्या उन लोगों के बारे में कुछ जानती है? 0.1% मुसलमानों को भी उनके बारे में मालूम नहीं है।”
आखिर अंग्रेज़ों के दस्तावेजों में चोरी-छिपे 'बाबरी मस्जिद' किसने जोड़ा? खुदाई में मिले साक्ष्यों से यह साफ़ है कि न केवल मस्जिद मंदिर तोड़कर बनी, बल्कि यह स्थल मस्जिद के सैकड़ों, हज़ारों साल पहले से मंदिर रहा है।
हिंदुओं का धर्मांतरण रोकने का अभियान हो या अयोध्या आंदोलन, असली रणनीतिकार मोरोपंत पिंगले ही थे। उनकी बनाई योजना के कारण ही देशभर में करीब तीन लाख रामशिलाएँ पूजी गईं। 25 हजार शिला यात्राएँ अयोध्या के लिए निकलीं। 40 देशों से पूजित शिलाएँ अयोध्या आईं।
वर्तिका सिंह ने कोर्ट में दी याचिका में इकबाल अंसारी पर मारपीट का आरोप लगाया था। साथ ही इकबाल अंसारी समेत 5 के खिलाफ देशद्रोह और कई अन्य मामलों को लेकर यह याचिका दायर की थी।
इस मामले में हिंदू और मुस्लिम पक्षों के सलाह-मशवरे के बाद के परासरन, सीएस वैद्यनाथन और राजीव धवन ने दलीलें ख़त्म करने के लिए अनुमानित समय का ज़िक्र किया। पाँच जजों वाली संविधान पीठ ने...