शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान हिन्दू महासभा ने कुछ कागज़ात और नक़्शे दिए थे। अदालत में ही धवन ने उन्हें एक-एक कर फाड़ना शुरू कर दिया। जब मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उन्हें टोका तो उन्होंने कुछ और पन्ने फाड़ डाले।
दावे से पीछे हटने के बदले में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने तीन शर्तें रखी है। उसने कहा है कि एएसआई के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए।
पराशरण ने कहा- यह राम का जन्मस्थान है, इसे बदला नहीं जा सकता। किसी को भी भारत के इतिहास को तबाह करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट को इतिहास की गलती को ठीक करनी चाहिए।
मुस्लिम पक्षकार राजीव धवन ने जस्टिस बोड़बे के सवाल का जवाब देते हुए एक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनके स्वामित्व वाली ज़मीन पर कोई हाथ धोने का आग्रह करता है और वह इजाजत दे देते हैं तो इसका अर्थ ये नहीं कि ये ज़मीन उनकी ही हो जाए।
10 दिसंबर तक ज़िले में धारा-144 लागू रहेगी। इस मामले में 17 नवंबर तक फ़ैसला सुनाए जाने की उम्मीद है। मुस्लिम पक्ष 14 अक्टूबर तक अपनी दलीलें पूरी करेंगे। हिंदू पक्षकारों को अपना जवाब पूरा करने के लिए 16 अक्टूबर तक का समय मिलेगा।
मध्यस्थता के लिए आयोजित इस बैठक का कुछ मुस्लिम संगठनों ने विरोध भी किया। इत्तेहादुल मुस्लिम मजालिस संगठन ने होटल के बाहर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि जब 18 नवम्बर तक फ़ैसला आ जाएगा तो उससे पहले मध्यस्थता का क्या मतलब है?
"प्रधानमंत्री सांमजस्यपूर्ण भारत की तलाश में हैं। जो संसद में दिए उनके बयान से पुख्ता होता है, लेकिन क्या राज्य और उसके कानून को इसका अनुसरण नहीं करना चाहिए? प्रधानमंत्री की आकांक्षाओं का खंडन करते हुए 49 साथियों पर देशद्रोह का आरोप लगाया गया है।"
मुंबई मेट्रो ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करता है। उसने साफ़ किया कि आरे मिल कॉलोनी क्षेत्र में अब एक भी पेड़ नहीं काटा जाएगा। हालाँकि, काटे गए पेड़ों, लड़कियों व अन्य चीजों को वहाँ से साफ़ करने और हटाने का काम अनवरत चालू रहेगा।
मुंबई के आरे कॉलोनी में मेट्रो शेड के निर्माण के लिए पेड़ काटे जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। इसके चंद मिनटों के भीतर ही सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की विशेष पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है।
मुंबई मेट्रो की प्रमुख अश्विनी भिड़े ने कहा है कि यह क़दम अनिवार्य था, इसे टाला नहीं जा सकता था। उन्होंने कहा कि कभी-कभी नए जीवन के फलने-फूलने के लिए और नए निर्माण के लिए तबाही अनिवार्य हो जाती है।