इस दौरान पाकिस्तान को अन्य देशों से समर्थन न मिल पाने का उनका दुःख भी झलका। उन्होंने कहा कि भारत का सभी देश समर्थन इसीलिए करते हैं क्योंकि वो बहुत बड़ा बाजार है और अन्य देशों को अपना बाजार खोने का डर है।
शाहीन बाग सहित पूरी दिल्ली में लोगों ने पहचान पत्र दिखाते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में यूजर्स ने चुटकी ली कि जो लोग कागज दिखाने से इनकार करते हैं आज वह पहचान पत्र लेकर लाइन में लगे हैं।
एग्जिट पोल्स के बाद आप ने ईवीएम की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। इस संबंध में केजरीवाल के घर पर एक बैठक हुई। इसमें मनीष सिसोदिया और प्रशांत किशोर भी मौजूद थे।
राजनैतिक पंडितों के दावे तब भी आज की तरह ही AAP के हक में थे। आप ऐसे ही अति आत्मविश्वास में थी। तब भी वोटों की गिनती 11 तारीख को ही हुई थी। जब नतीजे आए तो सारे दावे, सारा यकीन रेत की महल की तरह ढह गया था।
दिल्ली में 2013 और फिर 2015 में मतदान का नया रिकॉर्ड बना। दोनों ही बार आम आदमी पार्टी की सरकार बनी। सबसे कम वोटिंग 1998 में हुई थी, जब दिल्ली की सत्ता बीजेपी के हाथ से निकल कर कॉन्ग्रेस के पास चली गई थी।
बकौल रोहित उसके कैब में बैठने के बाद से यह यात्री फोन पर भड़काऊ बातें कर रहा था। शाहीन बाग़ के बारे में बातें कर रहा था। कह रहा था- "इस देश में आग लगने वाली है।"
बीजेपी ने अपनी शिकायत में कहा है कि AAP समर्थकों ने भ्रामक रीक्रिएशन के जरिए भाजपा की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया है। इस स्पूफ में अमित शाह को फिल्म के खलनायक गब्बर के रूप में दिखाया गया है तो वहीं दिल्ली भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी, विजय गोयल और सांसद गौतम गंभीर को डाकुओं के रूप में चित्रित किया गया है।
कोलकाता में CAA के समर्थन में बीजेपी द्वारा कैलाश विजयवर्गीय और मुकुल राय के नेतृत्व में रैली निकाली जा रही थी। लेकिन राज्य की ममता बनर्जी सरकार की पुलिस ने रैली को रुकवाया और उन्हें हिरासत में ले लिया।
2015 में करीब 67% मतदान हुआ था। इस बार भी ऐसा हुआ तो एक करोड़ के करीब वोट पड़ेंगे। दिल्ली में इस वक्त भाजपा के सदस्यों की संख्या 62 लाख के करीब है। इन सभी ने बीजेपी के लिए वोट डाले तो 11 फरवरी को करिश्मा तय है।
कॉन्ग्रेस के एक सांसद हंगामा करते हुए सत्तापक्ष की अग्रिम पंक्ति तक पहुँच गए और स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को घेर लिया। सांसद मणिकम टैगोर आक्रामक ढंग से डॉ हर्षवर्धन के बहुत नजदीक आ गए। जिसके बाद लोकसभा में हाथापाई की नौबत तक आ गई।