पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि 42 वर्षीय हेड कॉन्स्टेबल की मौत गोली लगने से हुई न कि पथराव के कारण। रिपोर्ट में लिखा गया है, "रतन लाल के शरीर में एक गोली लगी थी।"
उपद्रवियों ने पथवारी देवी मंदिर पर पथराव किया। वो यहीं पर नहीं रुके, आगे दो और मंदिरों पर ईंट-पत्थर फेंके। इससे हिंंदुओं में रोष व्याप्त हो गया। स्थानीय लोग विरोध में आ गए और महिलाएँ धरने पर बैठ गईं। हिंदू समुदाय के लोग उपद्रवियों पर कार्रवाई की माँग करने लगे।
दंगाइयों ने जिस हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की जान ली वह मूलरूप से राजस्थान के रहने वाले थे। दो दिन पहले ही माँ से फोन पर बात की थी। उनसे एक वादा किया था। लेकिन, मॉं को क्या पता था यह बेटे से आखिरी बात है।
नार्थ-ईस्ट दिल्ली में हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। मौजपुर और ब्रह्मपुरी इलाके में पत्थरबाजी की खबर है। कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया। दिल्ली पुलिस और आरएएफ के जवान इलाके में मार्च कर रहे हैं।
शाहरुख ने सोमवार को मौजपुर-जाफराबाद सड़क पर ताबड़तोड़ कई राउंड फायर किए थे। उसने करीब 8 राउंड फायर किए। इस दौरान एक पुलिसवाले ने उसे रोकने की काफी कोशिश की लेकिन वो नहीं रूका और फायर करते रहा।
CAA का विरोध करने वाली यह भीड़ इतनी 'शांतिप्रिय' है कि इसने आज पेट्रोल पम्प से लेकर बाइक, ऑटो, रिक्शा आदि को आग के हवाले कर दिया। विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी पिस्टल लेकर पहुँच गया, जिसने 8 राउंड फायरिंग भी की। आज ही कई मेट्रो स्टेशंस के पास मुस्लिमों को अपने बोरिया-बिस्तरों के साथ इकट्ठा होते हुए भी देखा जा रहा है। पूछने पर पता चला कि किसी 'दुआ' के लिए सभी लोग इकट्ठे हो रहे हैं।
जाफराबाद में संशोधित नागरिकता कानून (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी पिस्टल लेकर पहुँच गया। जानकारी के मुताबिक, उसने 8 राउंड फायरिंग भी की।
प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर ट्रैफिक जाम करने का प्रयास किया। पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की। महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की की गई और बैरिकेड तोड़ने की कोशिश हुई। अग्निश्मन दस्ते को मौके पर पहुॅंचने से रोका गया।
फरीदाबाद सड़क खोलने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे सरिता विहार जसोला आदि इलाके के लोगों का कहना है कि जब तक फरीदाबाद की सड़क नहीं खुलती, वो शाहीन बाग़ मेट्रो स्टेशन को जाने वाली सड़क बंद रखेंगे।
वामपंथियों के पास मूर्खों को छोड़ कर और कोई होता भी नहीं। या और गहरे उतरें तो यह कहना भी शास्त्रोचित है कि वामपंथी मूर्ख ही होते हैं। ये बात और है कि उन्हें अंत काल तक अपने मूढ़मति होने का पता नहीं चल पाता।