पर्याप्त पुलिस बल, सीएपीएफ और वरिष्ठ अधिकारी उत्तर पूर्वी दिल्ली में तैनात हैं। कुछ इलाकों में धारा 144 लागू है। दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। सभी मेट्रो स्टेशन खोल दिए गए हैं।
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के कई इलाक़ों में हिंसा अभी भी जारी है। चाँदबाग़ इलाक़े में हिंसा भड़कने के बाद फिर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। करावल नगर में जवानों पर एसिड फेंके जाने के बाद स्थानीय लोगों ने घरेलू तरीकों से उनका उपचार करने का प्रयास किया।
"लोग असंवेदनशील और अदूरदर्शी लोगों को सत्ता में बैठाने की कीमत चुका रहे हैं। भारत में नागरिकता कानून 1955 लागू था और उसमें किसी संशोधन की जरूरत नहीं पड़ी थी। तो कानून में अब संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी? संशोधन (सीएए) को तुरंत रद्द कर देना चाहिए।’’
"अपने-आप को कमतर मत आँकिए। विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ये तब तक चलता रहेगा, जब तक दोनों उल्टी न कर दें। इंशाअल्लाह, हमारे बहुत सारे लोग जो ज़मीन पर उतरे हुए हैं और इस कोशिश में लगे हुए हैं कि एनआरसी एवं एनपीआर लागू नहीं हो, वे सफल होंगे।"
देश के लिए जान देने वाले, दंगाइयों के हाथों मारे जाने वाले और अपना पूरा जीवन जनता की सुरक्षा में खपा देने वाले जवान के लिए कोई नेता आवाज़ क्यों नहीं उठा रहा? हिंसा करने वालों का नाम क्यों नहीं ले रहा?
नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हिंसा के दौरान शाहरुख़ ने पुलिस पर फायरिंग की थी। उसने कुल 8 राउंड फायर किए थे। उस वक़्त उसने लाल रंग की टीशर्ट पहन रखी थी। पूछताछ के बाद उसके बारे में कई और खुलासे होने की उम्मीद है।
ओवैसी, शरजील इमाम, हुसैन हैदरी, इकबाल, जिन्ना, लादेन की फेहरिश्त में आप नाम जोड़ते जाइए उन सबका भी जो शायद आपके आसपास बैठा हो, जो आपके साथ काम करता हो, जिनका पेशा कुछ भी क्यों न हो लेकिन वो लगे हों उम्मत के लिए ही।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ़ किया है कि इस स्टेज पर वो वार्ताकारों द्वारा फाइल की गई रिपोर्ट को केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और याचिकाकर्ताओं के साथ साझा नहीं कर सकती।
भीड़ ने जब मंदिर और पुलिस पर ज्यादा पथराव किया तो बदले में पुलिस ने पत्थरबाजों पर आँसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद वहाँ मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई और धरना दे रहीं महिलाएँ भी भाग गईं। देहलीगेट और ऊपरकोट इलाके में सुबह से जारी जुलूस प्रदर्शनों में भीम आर्मी के कार्यकर्ता भी शामिल रहे।