कपिल मायावती का बड़ा प्रशंसक है, जिसने मायावती के समर्थन में यूपी के विधानसभा चुनावों में जमकर प्रचार किया था। हालाँकि पेंच यह भी है कि जून 2017 से ही आरोपित युवक कपिल का फेसबुक अकाउंट बंद है। अब इसे लेकर पुलिस लगातार उससे पूछताछ कर रही है और...
मोदी-विरोध में डूबे कार्टूनिस्ट सतीश आचार्य को आईना दिखाया है अमोल ने। CAA-NRC से लेकर तान्हाजी Vs छपाक और गोडसे-गाँधी से लेकर केजरीवाल-JNU तक - कार्टूनिस्ट सतीश के प्रोपेगेंडा को कार्टून से ही जवाब दिया है अमोल ने।
"हमें इनके प्रदर्शन से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन सड़क खाली होनी चाहिए। ये लोग रामलीला मैदान, जंतर-मंतर या कहीं और प्रदर्शन कर लें। लेकिन धरना जल्दी से जल्दी खत्म कर सड़क खुलवाई जाए।"
घटना 31 जनवरी की बताई जा रही है। तोड़फोड़ का वीडियो भी सामने आया है। स्कूल प्रबंधन ने इसकी शिकायत करते हुए सुरक्षा की माँग की है। लेकिन, पुलिस मामला दर्ज करने में आनाकानी कर रही है।
साकेत ने ट्वीट कर दावा किया था कि उसे 'देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को' नारे के साथ रैली की अनुमति मिली है। बिना पुष्टि के कई मीडिया हाउस ने इसे हवा दी। इनमें प्रोपेगेंडा साइट द वायर से लेकर कॉन्ग्रेस मुखपत्र नेशनल हेराल्ड तक शामिल है।
इस रैली में न सिर्फ़ शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाए गए बल्कि जम्मू कश्मीर की 'आज़ादी' की भी बात कही गई। 'राजीव तेरे सपनों को, रावण तेरे सपनों को, पायल तेरे सपनों को- हम मंज़िल तक पहुँचाएँगे' जैसे भड़काऊ नारे लगाए गए।
मास्टरमाइंड शरजील इमाम पर शिकंजा कसने के बाद शाहीन बाग के उपद्रवी विरोध-प्रदर्शन बंद करने बहाना ढूँढ रहे हैं। हिन्दू सेना की धमकी, जामिया नगर फायरिंग और शाहीन बाग़ फायरिंग का हवाला दे लोगों से जमा होने का कहा जा रहा है।
सज्जाद ने शरजील इमाम का भी बचाव किया था। देशद्रोह के आरोपित शरजील को राष्ट्रवादी बताया था। कश्मीरी छात्र नेता सज्जाद ने पुलवामा आतंकी हमले के समय पूछा था कि कहीं इसके पीछे अपनी ही एजेंसियों का तो हाथ नहीं?
वरुण ग्रोवर और अनुराग कश्यप जैसों की नज़र अब देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक पर है। उसे धीमे-धीमे बर्बाद करने की साज़िश रची जा रही है। IIT बॉम्बे को चंद वामपंथी प्रोफेसरों व छात्रों ने बंधक बना लिया है। रवीश कुमार व अन्य वामपंथी मीडिया उनका समर्थन कर रहे हैं।
ऑपइंडिया ने अपनी ख़बर में दिवंगत नीरज के परिजनों के हवाले से बताया था कि झारखण्ड की हेमंत सोरेन सरकार पीड़ित परिवार पर लगातार दबाव बना रही है कि वो मीडिया व पुलिस में कहें कि नीरज प्रजापति की मौत बाथरूम में फिसलने के कारण हुई। अमित मालवीय ने भी इस आरोप की पुष्टि की है।