आरोपित कहता दिख रहा है कि हमारे देश में किसी की नहीं चलेगी, सिर्फ़ हिन्दुओं की चलेगी। पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले लिया है। कहा जा रहा है कि आरोपित ने शाहीन बाग़ के उपद्रवियों को वहाँ से जाने व विरोध प्रदर्शन स्थगित करने की चेतावनी दी थी। लेकिन, वे नहीं माने।
“मैं गाँव का रहने वाला हूँ। मैं जब मदद करता हूँ तो मर्दानगी से करता हूँ। मैंने तो शाहीन बाग वालों की भी मदद कर रखी है। शाहीन बाग बाले मुझे रोज फोन करते हैं।”
राहुल रौशन ने यह ट्वीट लेफ्ट लिबरल गिरोह के पत्रकारों पर व्यंगात्मक शैली में किया था। लेकिन अनुराग कश्यप ने मानो तय कर लिया था कि उन्हें जलील होना ही है। इसलिए व्यंग्य को न समझते हुए भी उन्होंने निशाना साधा लेकिन तीर उल्टा...
उसने मस्जिदों में भड़काऊ पर्चे बँटवाए थे। उसने सीएए और एनआरसी को लेकर कई पैम्पलेट तैयार किए थे, जिनमें भयभीत करने वाली भड़काऊ बातें लिखी हुई थी। उन पर्चों की प्रति भी जब्त कर ली गई है और उस दुकान को भी चिह्नित कर लिया गया है, जहाँ उन्हें छपवाया गया था।
पीएम मोदी ने इस बैठक में कहा कि CAA पर हमने कुछ भी गलत नहीं किया है, बल्कि हमको फ्रंटफुट पर और आक्रामक रहना है। बैठक में उन्होंने कहा कि CAA से किसी की नागरिकता नहीं जा रही है, बल्कि नागरिकता देने के लिए यह लाया गया है।
शरजील ने देश को तोड़ने की पूरी तैयारी कर चुका था, जिसने प्लान तैयार किया था कि सीएए के विरोध में देश के सभी प्रमुख राजमार्गों पर चक्का जाम कर दिया जाए। इससे पूरे देश में अराजकता का माहौल पैदा हो जाएगा और इसके दवाब में आकर सरकार सीएए और एनआरसी को वापस ले लेगी।
मजिस्ट्रेट ने उसकी माँग को मंजूरी देते हुए उसे किताबें मुहैया करवाने का आदेश दिया। जज ने नाबालिग छात्र से ट्यूशन पढ़ने के लिए भी पूछा था, जिसका नाबालिग छात्र ने कोई जवाब नही दिया। नाबालिग छात्र की सेवा कुटीर में कॉउन्सिलिंग भी की जाएगी।
दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने जामिया हिंसा मामले में आरोपित इलियास को गिरफ्तार कर लिया है। ज्ञात हो कि यह गिरफ्तारी दिसंबर 13, 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के पास के क्षेत्र में हुई हिंसा के मामले में हुई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं कि उत्तर प्रदेश में देश-विरोधी गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा था कि पुरुष घर में रहे रजाई ओढ़ कर सो रहे हैं और उन्होंने जानबूझ कर महिलाओं व बच्चों को सड़क पर बैठने के लिए छोड़ दिया है।
"1919 में दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने बाद अंग्रेज यह समझ गए थे कि हिंदुस्तान में उनके खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में उन्होंने रॉलेट एक्ट जैसे कानून को भारत में लागू किया। वर्ष 1919 के इस रॉलेट एक्ट और 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को अब इतिहास के काले कानून के रूप में जाना जाएगा।"