सीएए के समर्थन में आयोजित रैली में शामिल नीरज प्रजापति मुस्लिमों की हिंसा का शिकार बने थे। परिजनों ने ऑपइंडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि पुलिस व प्रशासन ने जल्दी-जल्दी अंतिम संस्कार कराने के चक्कर में धार्मिक रीति-रिवाज भी पूरा नहीं करने दिया।
जेएनयू छात्र संगठन ने लिखा, "शरजील उस अल्पसंख्यक मुस्लिम पहचान का नेतृत्व करते हैं, उसे तो निशाना बनाया ही जा रहा है और इसके लिए विरोधी और दबे हुए तबके की आवाज़ को कुचलने वाले क़ानून का इस्तेमाल किया जा रहा है।"
शाहीन बाग़ में हो रहे उपद्रव पर बोलते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि सोते हुए लोगों को तो जगाया जा सकता लेकिन इन्हें कोई नहीं जगा सकता। उन्होंने कहा कि शाहीन बाग़ में बैठे लोगों की पीड़ा सीएए नहीं है, बल्कि अनुच्छेद 370 है, तीन तलाक़ है और राम मंदिर है।
हिजाब और बुर्का पहनी महिला इस वीडियो में कहती है कि आजकल आ रहा हर क़ानून मोदी का है, ऐसा कौन सा क़ानून है जो दूसरे का है? जब बुर्कानशीं महिला को याद दिलाया जाता है कि इस मामले में अभी कोर्ट ने कोई फ़ैसला नहीं दिया है तो वो कहती है कि कोर्ट भी तो 'उन्हीं' का है।
"दंगाइयों ने मेरे पति को दौड़ा कर उनके सिर पर रॉड से वार किया। इसके बाद वो किसी तरह भागते हुए घर पहुँचे। वहाँ पहुँच कर उन्होंने मुझे सारी बातें बताईं। इसके बाद वो अचानक से बेहोश हो गए।" - क्या मुख्यमंत्री सोरेन सुन रहे हैं मृतक की पत्नी की दर्द भरी आवाज़?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान में निकले रोजगार के एक विज्ञापन का जिक्र किया। इसमें सफाई के कामों के लिए कर्मचारियों की वैकेंसी निकाली गई थी। इस वैकेंसी में सिर्फ गैर-मुस्लिमों को ही पात्र बताया गया था।
CAA का समर्थन करने गए नीरज तो अब नहीं रहे... लेकिन छोड़ गए एक बेटी और एक बेटे को। दोनों ही छोटे हैं। कमाने वाले वो अकेले थे। अब सारा बोझ उनकी पत्नी पर! फिर भी परिजनों की माँग नहीं सुन रही है सोरेन सरकार। क्योंकि CM साहब मंत्रिमंडल विस्तार में व्यस्त हैं। किसी भी मंत्री ने पीड़ित परिजनों की सुध लेने की कोशिश नहीं की।
प्रदीप भंडारी रिपब्लिक टीवी के शो ‘ललकार’ को होस्ट कर रहे थे। इस दौरान जैसे ही उन्होंने इमाम को देशद्रोही और देश के लिए खतरा बताया, एक पैनलिस्ट पहले तो जोर-जोर से चिल्लाने लगा और फिर उनके साथ बदसलूकी भी की।
शरजील ने लोगों को सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकेन्स नेक) को ब्लॉक कर के पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग-थलग करने के लिए भड़काया था और अपनी 'टुकड़े-टुकड़े' वाली मानसिकता का परिचय दिया था। उसे बिहार के जहानाबाद से गिरफ़्तार किया गया।