पुलिस का कहना है कि ये लोग हिंसा में प्रत्यक्ष रूप से शामिल थे और आम जनता से इनकी जानकारी साझा करने के लिए कहा है। पुलिस ने संभावित आरोपितों के बारे में किसी भी तरह की जानकारी के लिए इनाम भी रखा है।
अपनी माँगों को लेकर एएमयू छात्रों द्वारा रोड जाम करने वाले 600 अज्ञात छात्रों के खिलाफ यूपी पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसके बाद से पुलिस सीसीटीवी कैमरे खंगालकर दोषियों की पहचान करने में जुट गई है।
हाल ही में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित काजी मासूम अख्तर ने कहा कि मुझे अपने जीवन जीने से डर है और बंगाल में मेरी कभी भी हत्या की जा सकती है। उन्होंने सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन पर कहा कि इससे मुस्लिमों को डरने की कोई जरूरत नहीं है।
देश के ख़िलाफ़ बयानबाजी करने वालों को अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में छिपाया जाता रहा है। उनके प्रति संवेदना दिखाई जाती रही है। एक तय क्रम के साथ उनके विवादों में आने के बाद उन्हें हीरो बनाने की कोशिश हुई। उससे पहले से मालूम चल चुका है कि शर्जील इमाम के मामले में अब आगे क्या होगा?
मुर्शिदाबाद में CAA के विरोध में बुलाई गई बंद के दौरान हिंसा भड़की। टीएमसी, माकपा और कॉन्ग्रेस एक-दूसरे को इसके लिए कसूरवार ठहरा रहे हैं। कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया।
हॉस्टल में रहने वाले छात्रों के लिए 15 बिंदुओं वाली नियमावली जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि यहॉं रहने वाले लोग किसी भी देश विरोधी, गैर सामाजिक या किसी अवांछनीय गतिविधियों का हिस्सा नहीं बनेंगे।
तपन बोस ने भारतीय सेना को लेकर कहा कि पाकिस्तान कोई दुश्मन देश नहीं है। शासक वर्ग चाहे भारत का हो या पाकिस्तान का, एक जैसा है। हमारी सेना भी पाकिस्तानी सेना जैसी है। पाकिस्तानी सेना भी अपने ही लोगों को मारती है और हमारी सेना भी। दोनों में कोई अंतर नहीं है।
....रवीश जी ने कहा था टीवी मत देख, हम नहीं माने। लेकिन अब तो मानो, सरकार हमें दफन करना चाहती है, मारना चाहती है। सरकार के पास पैसा, पुलिस, फ़ौज और अदालतें भी हैं। हमारे पास कुछ भी नहीं है, ना सरकार, ना फ़ौज, ना पुलिस।
44 साल की मायावती को साँस लेने में तकलीफ हो रही थी। तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई तो उनके पति ने एंबुलेंस को फोन किया। लेकिन एंबुलेंस शाहीन बाग में प्रदर्शन के कारण फंसी रही। इस बीच मायावती की हाल बिगड़ती ही गई।
राज्यपाल ने अपने सम्बोधन का पैराग्राफ 18 पढ़ने से इनकार कर दिया। इस पैराग्राफ में सीएए को असंवैधानिक और भेदभाव करने वाला बताया गया था। सीएए के बारे में इस तरह की बातें लिखे जाने पर राज्यपाल ने आपत्ति जताई।