जिसने माँ सरस्वती की कई मूर्तियाँ अपने हाथों से गढ़ी थी, वो इन मूर्तियों को बेच भी नहीं पाया। सीएए के समर्थन की सज़ा उसे मौत के रूप में मिली। मुस्लिमों की इस हिंसा का शिकार हुए नीरज के पिता भी बीमार रहते हैं और उनके दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। ऊपर से परिजनों पर सरकार का दबाव।
CAA रैली में मुस्लिमों ने लोहे के रॉड से उनके माथे पर पीछे से वार किया। कई दिनों से अस्पताल में भर्ती नीरज की मौत हो गई। प्रशासन व पुलिस पीड़ित परिजनों पर दबाव डाल रहा है कि वो ऐसा बोलें कि नीरज की मौत बाथरूम में गिरने से हुई है। किसे बचाने का प्रयास कर रही हेमंत सरकार?
"मुस्लिमों को हमेशा काले रंगों में डार्क लाइटिंग के साथ दिखाया गया। जबकि हिंदुओं को रोशनी और रंगीन कपड़ो में। ये बेहद शर्मनाक और खतरनाक है। हम ऐसी फिल्मों के जरिए अपने बच्चों को जाहिल बना रहे हैं।"
लोहरदगा में हुई हिंसा में घायल होने के बाद उन्हें राँची के ऑर्किड अस्पताल में भर्ती किया गया था। यहाँ से 2 दिन के इलाज के बाद ब्रेन हेमरेज व स्थिति गंभीर बताकर उसे रिम्स रेफर कर दिया गया था। CAA के समर्थन में निकाले गए तिरंगा यात्रा के दौरान पत्थरबाजी में नीरज घायल हो गए थे।
कॉन्ग्रेस चालाक निकली। उसने दिग्विजय और मणिशंकर जैसे नाकारा नेताओं को वहाँ भेज इतिश्री कर ली। 'सरजी' राजनीतिक फसल काटने के लिए लालच में आ गए। अमानतुल्लाह-सिसोदिया ने काम बिगाड़ दिया। अब शाहीनबाग़ वो कुल्हाड़ी बन गया है, जिसे दिल्ली के मुखिया ने अपने पाँव पर ही दे मारा।
इन लोगों ने हाथों में तख्तियाँ और तिरंगा झंडा लिया हुआ था। इन तख्तियों में लिखा था कि भारत के संविधान और 'वन्दे मातरम' का सम्मान करो। इसी रैली में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने वाले फ़ैसले की भी तारीफ की गई। स्कॉटलैंड में खालिस्तानियों के ख़िलाफ़ नारेबाजी हुई।
पश्चिम बंगाल अब चौथा राज्य बन गया है, जहाँ CAA के खिलाफ प्रस्ताव पास हो चुका है। इससे पहले केरल, पंजाब और राजस्थान विधानसभा में सीएए विरोधी प्रस्ताव पास किया जा चुका है।
इमरान कहते हैं कि हिटलर ने आत्महत्या की थी और तानाशाहों का ऐसा ही अंत होता है। आज के दौर में वो तानाशाह किसे कह रहे हैं और किसके मौत की दुआ माँग रहे हैं? मोदी को संविधान का कातिल कहने से पहले उन्होंने अपने साथी शरजील से क्यों नहीं बात की?
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायाधीश एस अब्दुल नज़ीर और न्यायाधीश संजीव खन्ना की पीठ ने इस कानून को चुनौती देने वाली दर्जनों याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया। हालाँकि, पीठ ने साफ़ किया त्रिपुरा और असम से संबंधित याचिकाओं पर अलग से विचार किया जाएगा।
वयोवृद्ध मार्क्सवादी नेता रमेश प्रजापति सीएए से नाराज़ थे। जब उन्होंने खुद को आग लगाई तब उनके पास CAA और NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) को लेकर कुछ कागजात थे। उनके परिवार ने इस मामले में पुलिस से जाँच की माँग की है।