"ये विरोध CAA का विरोध नहीं है, ये नरेन्द्र मोदी जी का विरोध है। हमने बार-बार बताया कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी की नागरिकता नहीं छिनता। इस देश का हर मुस्लिम नागरिक इज्जत के साथ इस देश में रहता है और रहेगा।"
यूरोपीय संघ की संसद में CAA के खिलाफ प्रस्ताव लाने के पीछे यूके के सांसद शफ्फाक मोहम्मद का दिमाग है, जो कि मूल रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) का रहने वाला है। POK में मीरपुर का निवासी शफ्फाक मोहम्मद 2019 से यूरोपियन पार्लियामेंट का सदस्य है।
"शरजील के ख़िलाफ़ असम और उत्तर प्रदेश की पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की है, वो निंदाजनक है। शरजील सिर्फ़ नागरिकता संशोधन कानून का मौख़िक आलोचक है और AMU में जो उसने असम के बारे में बयान दिया, उसे संघ के लोग और भाजपा प्रवक्ता गलत तरह से पेश कर रहे हैं।"
"हम अपनी विचारधारा से समझौता नहीं कर रहे बल्कि अपने तरीके और स्ट्रेटेजी बदल रहे हैं। सभी जाति, धर्म के लोग साथ आएँ। घर पर खूब मजहबी नारे पढ़कर आइए, उनसे आपको ताकत मिलती है। लेकिन सिर्फ मुस्लिम बनकर विरोध मत कीजिए, आप लड़ाई हार जाएँगे।"
प्लस पोलियो की टीम को स्थानीय लोगों द्वारा NPR और NRC का डाटा तैयार करने वाली टीम समझकर पहले उनके साथ मारपीट की गई और फिर स्टाफ की एक महिला के साथ अभद्रता भी की गई। यही नहीं, इसके बाद दोनों कर्मचारियों को करीब एक घंटे तक घर में बंधक बनाकर रखा गया।
छात्रों ने यह नारेबाजी तब शुरू की जब कुलपति ने अपने भाषण के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में गत 15 दिसंबर को CAA के खिलाफ प्रदर्शन के मामले में जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में AMU के छात्रों के उग्र प्रदर्शन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
तब भी ऐसा ही मजहबी उन्माद था। इसी तरह के नारे और ऐसी ही साजिशें थी। उस समय इसकी आग में कश्मीर के हिंदू जले थे। आज नहीं चेते तो अगला नंबर आपका हो सकता है।
यह देखना हास्यास्पद है कि जब इस CAA-NRC विरोध प्रदर्शन को शुरू करने वाला शाहीन बाग ही शरजील इमाम से पीछा छुड़ाना चाह रहा है, तब यहाँ जेएनयू में अपनी पहचान तलाश रहा BAPSA शरजील के मुस्लिम होने और सताए जाने की बात करते हुए इसमें ब्राह्मणवाद निकाल लाया है।
मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू ने बयान जारी कर बताया कि क्राइम ब्रांच ईटानगर ने शरजील के ख़िलाफ़ मामल दर्ज किया है। खांडू ने कहा कि इस तरह के भड़काऊ बयान देकर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और सम्प्रभुता को खंडित करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
"हिन्दू माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं क्योंकि मुस्लिम अपने बच्चों को जिहादी बना रहे हैं। दंगाई मुस्लिम भीड़ ने 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' का नारा लगाते हुए न सिर्फ़ ईंट-पत्थर फेंके बल्कि गोली चलाई और पेट्रोल बम भी दागे। मुस्लिम महिलाएँ मिर्ची पाउडर फेंक रही थीं।"