पुलिस द्वारा FIR में कसाइयों का ज़िक्र न किए जाने से लोगों में आक्रोश पनप गया। हिन्दू युवा वाहिनी समेत कई संगठनों ने इस घटना के ख़ुलासे के लिए पुलिस प्रशासन को 48 घंटे की मोहलत दी है। साथ ही मृतक के परिजनों के लिए मुआवज़े के तौर पर 25 लाख रुपए की माँग भी की।
देश में मवेशियों के व्यापार पर प्रभावी रोक ने इस अवैध व्यापार को प्रभावित किया है। फिर भी, भारत-बांग्लादेश सीमा पर पशु तस्करी का यह दुष्चक्र बीएसएफ के लिए एक बड़ी चुनौती है, जिसका कोई अंत नहीं है।
गो तस्करों ने 10-15 राउंड फायर किए, इससे अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने एक गो तस्कर को दबोच लिया। ग्रामीणों ने पकड़े गए गो तस्कर सलीम के साथ मारपीट भी की। सलीम के दो अन्य साथी मौके से भागने में कामयाब रहे थे।
सौ करोड़ की आबादी, NDA के 45% वोट शेयर में आखिर किसके वोटर कार्ड हैं? फिर सवाल कौन पूछेगा इन हुक्मरानों से? आलम यह है कि तीन चौथाई बहुमत वाले योगी जी के राज्य में, हिन्दुओं को अपने घरों पर लिखना पड़ रहा है कि यह मकान बिकाऊ है!
अपने मनसूबों को विफल होता देख तस्करों ने सुरक्षाबलों पर घातक हमला भी किया। लेकिन फिर भी जवानों ने हार नहीं मानी और सीमा पार होने वाली अवैध तस्करी को नाकाम कर दिया।
कथित पशु तस्करों के परिजनों ने ग्रामीणों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस पशु तस्करों के आपराधिक रिकॉर्ड की जॉंच भी कर रही है। मृतकों की पहचान नौशाद क़ुरैशी, राजू नट और वीरेश नट के रूप में की गई है।
पर्यावरण एवं पशु कल्याण मंत्रालय ने ओडिशा सरकार को पहले से ही आगाह कर रखा है कि राज्य के 6 जिलों से मवेशियों को ट्रांसपोर्ट कर पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना ले जाया जाता है। मंत्रालय ने ओडिशा के परिवहन विभाग को सभी प्रमुख जगहों ख़ासकर राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों में चेक पोस्ट बनाने को कहा था।
अलवर की एक अदालत ने ग़ैर-क़ानूनी तरीके से गोवंश की ढुलाई के आरोपित पहलू ख़ान के दो बेटों और एक ट्रक ऑपरेटर के ख़िलाफ़ आगे जाँच करने की अनुमति दे दी है। अदालत ने गौ तस्करी मामले में आगे की जाँच के लिए पुलिस द्वारा दी दलील स्वीकार कर ली है।