दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों में पूरी तरह तबाह शिव विहार पार्किंग के मालिक गजेंद्र परिहार ने बताया कि FIR में उन्होंने डर से कई चीजें नहीं बताई हैं और किसी को निशाना नहीं बनाया है, क्योंकि उन्हें इसी क्षेत्र में रहना है।
इस चार्जशीट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय की एक भीड़ ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बृजपुरी पुलिया की तरफ से आई और हिंदुओं की संपत्तियों को निशाना बनाते हुए दंगा करना शुरू कर दिया और 24 फरवरी की देर रात तक उनमें आगजनी करती रही।
वहाँ टी स्टॉल के बगल में स्थित रजाई-गद्दों की एक दुकान को भी जला डाला गया। वहाँ स्थित एक ग़रीब की ठेले को भी आग के हवाले कर दिया गया। सूरज जी अपनी चाय की दुकान जलाए जाने के बाद से लगातार भटक रहे हैं और उन्हें अब न्याय की उम्मीद है।
"चाँदबाग चौराहे के पास ही दुर्गा फकीरी मंदिर है। पेट्रोल पंप फूँकने के बाद दंगाई तेजी से चारो तरफ आग लगा रहे थे। शाम का समय था। दहशत और शोर बढ़ता जा रहा था। जैसे ही भारी संख्या में दंगाइयों की नजर मंदिर की तरफ पड़ी तो सबसे पहले मंदिर बचाने के लिए मंदिर के पुजारी प्रार्थना करने लगे। दंगाइयों ने मंदिर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी थी।"
कविता ने मुश्किल वक्त में भी हौसला नहीं छोड़ा। फिर भी अपना सुहाग नहीं बचा पाई। उसके सास-ससुर तो इतने डरे हुए हैं कि श्मशान घाट से ही गॉंव लौट गए। शिव विहार के उस घर तक जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाए जहॉं उनका लाडला रहता था।
हिंदुओं के डर के 5 खौफनाक सबूत - 1) हिंदू विरोधी हिंसा में मारे गए राहुल ठाकुर का सुनसान बृजपुरी इलाका 2) शिव विहार में मारे गए आलोक तिवारी के परिवार की FIR से मनाही 3) गायब हुए धर्मेन्द्र की गली में लटके ताले 4) जोहरीपुर में माथे में ड्रिल घुसे विवेक की माँ का बात करने से इंकार 5) जाफराबाद से किराएदारों का पलायन!
ये महिलाएँ हैं दिल्ली के दंगा प्रभावित इलाक़ों की। ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान इन्होंने बताया कि वो पल-पल दंगाई भीड़ के डर के साए में जी रही हैं। महिलाओं ने अपना दुःखड़ा सुनाते हुए कहा कि समुदाय विशेष के लोग आकर उनके घरों को आग के हवाले करने की धमकी देते हैं।