उत्तर-पूर्वी इलाकों में जारी हिंसा के बीच NDTV की जर्नलिस्ट निधि राजदान ने ट्वीट शेयर करते हुए लिखा कि उसके कुछ सहकर्मियों को दंगाइयों की एक भीड़ ने बुरी तरह से पीटा और तभी छोड़ा जब उन्होंने अपनी पहचान 'हिन्दू' के रूप में बताई।
एक व्यथित हिन्दू ने कहा- "आप आए हैं। बहुत बड़ी बात है। यहाँ तो अभी तक कोई भी नहीं आया, हमारा आदमी मार दिया गया।" नितिन कहते हैं कि उनके सिर से पिता का साया उठ गया। नितिन ने उस रात कई दरवाजे खटखटाए लेकिन किसी ने भी मदद नहीं की।
इस नैरेटिव से बचिए और पूछिए कि जिसकी गली में हिन्दू की लाश जला कर पहुँचा दी गई, उसने तीन महीने से किसका क्या बिगाड़ा था। 'दंगा साहित्य' के कवियों से पूछिए कि आज जो 'दोनों तरफ के थे', 'इधर के भी, उधर के भी' की ज्ञानवृष्टि हो रही है, वो तीन महीने के 89 दिनों तक कहाँ थी, जो आज 90वें दिन को निकली है?
मिश्रा ने ये भी आरोप लगाया है कि ताहिर हुसैन के घर से लगातार पेट्रोल बम चलाए जा रहे हैं और गोलीबारी भी की जा रही है। ये बहुत बड़ा आरोप है क्योंकि अंकित शर्मा की हत्या को ख़ुद मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने बहुत ही दुखद क्षति बताया है।
"शांति और समरसता हमारी प्रकृति का मूल केंद्र रहा है। मैं दिल्ली के भाइयों-बहनों से अपील करता हूँ कि वो हर परिस्थिति में शांति एवं भाईचारा का माहौल बनाए रखें। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि जितनी जल्दी हो सके, सभी क्षेत्रों में शांति स्थापित हो।"
जस्टिस मुरलीधर ने कोर्ट में कपिल मिश्रा के बयान वाला वीडियो चलाने का आदेश दिया। पुलिस अधिकारी ने पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा के साथ खड़े सब-इंस्पेक्टर की पहचान की।
मंगलवार शाम को अंकित शर्मा ड्यूटी से घर लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि चाँदबाग पुलिया पर कुछ दंगाइयों ने उन्हें घेर लिया और पीट-पीट कर हत्या कर दी। इसके बाद शव को नाले में फेंक दिया।
शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई 23 मार्च तक टाल दी है। कहा कि शाहीन बाग मुद्दे पर सुनवाई से पहले उदारता और स्थिति के शांत होने की जरूरत है। बताया कि वार्ताकारों ने पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
इससे पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक विडियो में 2-3 लोग एक हिंदू के शव को भीड़ से दूर लेकर जाते नजर आए थे। लेकिन भीड़ अचानक से गली के बाहर आकर अल्लाहु अकबर और नारा-ए-तकबीर का नारा लगाने लगती है। मारे गए युवक का नाम विनोद बताया जा रहा है।
पर्याप्त पुलिस बल, सीएपीएफ और वरिष्ठ अधिकारी उत्तर पूर्वी दिल्ली में तैनात हैं। कुछ इलाकों में धारा 144 लागू है। दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। सभी मेट्रो स्टेशन खोल दिए गए हैं।