जब दो BARC अधिकारियों को तलब किया गया, एक उनके सतर्कता विभाग से और दूसरा IT विभाग से, दोनों ने यह बताया कि मुंबई पुलिस ने BARC से कोई भी रॉ (raw) डेटा नहीं लिया था।
इस डील में कुछ फायदा प्रताप सरनाईक को जाना तय हुआ था। इसके अलावा खास बात ये है कि टॉप्स ग्रुप और प्रताप सरनाईक के बीच इस डील को लेकर कोई लिखित कॉन्ट्रैक्ट नहीं हुआ था।
सरनाईक पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है, जिसके कारण ईडी ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया। तलाशी अभियान के बाद ईडी के अफसरों ने ठाणे स्थित ठिकाने से सरनाईक के बेटे विहंग सरनाईक को हिरासत में ले लिया।