अब तक, कर्नाटक की ही एकमात्र सरकार है जिसने जनता की भावनाओं का ध्यान रखा है और दिवाली में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने के अपने निर्णय को वापस लिया है।
ब्रज क्षेत्र में फाल्गुन माह लगते ही होली की शुरूआत हो जाती है, लेकिन इसके सबसे खास बरसाने की लड्डू मार होली और लट्ठ मार होली मानी जाती है। वृंदावन मथुरा और खासकर बरसाना में मनाई जाने वाली लट्ठ मार होली और लड्डू मार होली को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों की भीड़ एकत्र होती है।
रंगों के त्योहार होली की शुरुआत बुंदेलखंड के एरच कस्बे से हुई है, जो झाँसी जिले में पड़ता है। चौंक गए ना? दरअसल यही वो कस्बा है, जो कभी असुरराज हिरण्यकश्यप की राजधानी हुआ करता था।
सनातन में ऐसी कहानियों का बहुत गूढ़ अर्थ था। प्रतीक रूप से ऐसा माना जाता है कि प्रह्लाद का अर्थ आनन्द होता है। वैर और उत्पीड़न की प्रतीक होलिका (जलाने की लकड़ी) जलती है और प्रेम तथा उल्लास का प्रतीक प्रह्लाद (आनंद) अक्षुण्ण रहता है।
जल्लीकट्टू तमिलनाडु के ग्रामीण इलाकों का एक परंपरागत खेल है जो पोंगल पर आयोजित किया जाता है। इस दौरान स्थानीय युवक सॉंड पर काबू पाने की कोशिश करते हैं।
समुदाय विशेष का जिक्र किए जाने पर आपत्ति को डीएम ने खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि खुफिया एजेंसी से मिले इनपुट को ध्यान में रख कर ही उन्होंने आदेश जारी किया और इसका मकसद सांप्रदायिक सौहार्द्र बनाए रखना था।