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Indian Independence

जिन्होंने डिजाइन किया भारत का राष्ट्रध्वज, गरीबी में हुई उनकी मौत: नेहरू के भारत में झोपड़ी में रहने को थे मजबूर, बेटे ने इलाज...

भारत का राष्ट्रध्वज तिरंगा डिजाइन करने वाले तेलुगु ब्राह्मण परिवार में जन्मे पिंगली वेंकैया का जीवन गरीबी में बीता। कई भाषाओं व क्षेत्रों के विद्वान थे।

12 जुलाई का वो पन्ना जिसे नेहरू के ‘टाइपिस्ट इतिहासकारों’ ने छिपाया: जब मूसलाधार बारिश के बीच RSS के संस्थापक सरसंघचालक हेडगेवार का स्वागत...

भारत के स्वाधीनता आंदोलनों को लेकर अनेक अध्याय एवं ऐतिहासिक तिथियाँ हैं। ऐसी ही एक तिथि है 12 जुलाई 1922।

‘अहिंसा से मिली आज़ादी’ वालों को जवाब है काशी के क्रांतिवीरों की गाथा, वो दौर जब मातृभूमि को समर्पित हुआ करते थे पत्रकार

कलम की ताकत व हौसला तो देखें कि 'स्वराज्य पत्र' को निरंतर संपादित व प्रकाशित करने के लिए कितने ही कलम क्रांतिवीर बलिदान हो जाते हैं।

…जब सुभाष चन्द्र बोस भटकने लगे थे तो स्वामी विवेकानंद के कारण ही रास्ते पर लौटे, तभी हुआ था क्रांति का उदय

"स्वामी विवेकानंद ने कभी कोई राजनीतिक संदेश नहीं दिया, लेकिन उनके संपर्क में आने वालों में देशभक्ति और राजनीतिक मानसिकता की भावना विकसित हुई।"

स्वतंत्रता सेनानियों के गुप्त प्रवास की एक गाथा, कैसे जुटाए अर्थ और अस्त्र : क्यों पढ़नी चाहिए ‘क्रांतिदूत’ की झाँसी फाइल्स

काकोरी कांड के बाद जिस तरह अंग्रेजी पुलिस क्रांतिकारियों की तलाश में कुत्तों की तरह घूम रही है। ऐसे में इनका सुरक्षित और गुप्त रहना ज़रूरी था।

हाथ में कमंडल, जेब में एक भी पैसा नहीं… सवारी डिब्बे में स्वामी विवेकानंद के साथ बाल गंगाधर तिलक की ऐसे हुई थी मुलाकात

बाल गंगाधर तिलक से स्वामी विवेकानंद की पहली भेट बम्बई से पुणे जाते समय यात्री डिब्बे में हुई थी। विवेकानंद के पास बिलकुल भी पैसे नहीं थे और...

नेहरू ने नेताजी पर द्वीप का नाम रखने का प्रस्ताव ठुकरा दिया, संसद में कॉन्ग्रेस ने बोस को बताया था ‘आतंकी’: PM मोदी दे...

आज़ादी के आबाद अंडमान द्वीप का नाम परिवर्तित कर उसे सुभाष चन्द्र बोस के नाम पर ‘सुभाष-द्वीप’ रखने के सुझाव को नेहरू ने अनदेखा कर दिया।

बढ़ता आरक्षण हो, समान नागरिक संहिता या… कुछ और: संविधान दिवस बनेगा विमर्शों का कारण, पिछले 7 सालों में PM मोदी ने दी है...

विमर्शों का कोई अंतिम या लिखित निष्कर्ष निकले यह आवश्यक नहीं पर विमर्श हो यह आवश्यक है क्योंकि वर्तमान काल भारतीय संवैधानिक लोकतंत्र की यात्रा के मूल्यांकन का काल है।

‘दूसरा गाल आगे करने से भीख मिलती है, आज़ादी नहीं’: कंगना का ‘बापू’ पर वार, कहा- ‘गाँधी चाहते थे भगत सिंह की फाँसी, नेताजी...

कंगना रनौत ने महात्मा गाँधी पर निशाना साधते हुए लिखा, "भारत पर अत्याचार करने वालों के विरुद्ध लड़ने का साहस न रखने वाले कुछ नेता सत्ता के भूखे थे, धूर्त थे।

पेरियार ने मनाया था शोक, आंबेडकर के लिए बाकी थी ‘सच्ची आज़ादी’, लेफ्ट ने कहा था ‘झूठी आज़ादी’: फिर कंगना पर बवाल क्यों?

आंबेडकर ने बताया था 'ट्रू सेन्स' में आज़ादी कब मिलेगी। पेरियार ने 15 अगस्त, 1947 को शोक मनाया था। वामपंथियों ने कहा था - 'ये आज़ादी झूठी है।'

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