हिलाल 30 मार्च 2019 को जम्मू-कश्मीर के बनिहाल में आत्मघाती कार बम हमले की योजना बनाने में शामिल था। उसका संबंध हिजबुल मुजाहिदीन की ब्रांच इस्लामी जमात तोलबा के साथ है और जम्मू-कश्मीर पुलिस काफी समय से उसकी तलाश कर रही थी।
सोशल मीडिया पर एक तस्वीर ‘वायरल’ की जा रही है, जिसके कारण JNU की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद से लेकर कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती तक का दिल दुखा है और वो यासीन मलिक को इस 'फर्जी' तस्वीर के अनुसार मिलने वाली यातनाओं के खिलाफ सरकार से रहम की अपील कर रही हैं।
एंबुलेंस आने पर मरीज हसान-उल-हक को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि सीआरपीएफ जवान संदीप कुमार और डॉक्टर सुनीम खान के समय पर उपचार करने की वजह से मरीज की जान बच गई।
आरएसएस नेता और उनके गार्ड पर हुए हमले में हमलावर आतंकी की पहचान कर ली गई है। साथ ही हत्या में इस्तेमाल की गई कार को भी जब्त कर लिया गया है।जानकारी के मुताबिक, मामले में गुलाम मोहम्मद सागर के बेटे जाहिद हुसैन सागर की पहचान आरोपी के तौर पर की गई है।
मृतक लड़की की बहन ने बताया कि उसके पिता वलायत कुरैशी पिछले कई सालों से उसके साथ बलात्कार कर रहे थे पर पिता द्वारा जान से मारे जाने की धमकी के डर से वह किसी को अपनी आपबीती नहीं बता पा रही थी। पुलिस ने बताया कि पीड़ित लड़की ने जहर खाकर आत्महत्या की। लड़की को अस्पताल में भरती कराया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका।
सब कुछ विश्लेषण करने के बाद अपनी ज़मीन वापस पाने के लिये 13 अप्रैल 1984 को बाकायदा ऑपरेशन मेघदूत चलाया गया जिसकी नायक थे लेफ्टिनेंट जनरल प्रेम नाथ हून और लेफ्टिनेंट कर्नल डी के खन्ना। तब से हमारी सेनाएँ सियाचिन की रखवाली कर रही हैं।
विस्थापितों की अधिकांश जनसंख्या को शेख अब्दुल्ला ने रोक लिया और उन्हें यह भरोसा दिलाया कि उन्हें राज्य में सब कुछ दिया जाएगा। सब कुछ देने के नाम पर पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों को 1954 में अनुच्छेद 35-A का संवैधानिक छल उपहार स्वरूप दिया गया।
यह हमला अस्पताल की ओपीडी में किया गया। जहाँ आरएसएस नेता/चिकित्सा सलाहकार चंद्रकांत अपने बॉडीगॉर्ड के साथ मौजूद थे। जैसे ही यह हमला हुआ अस्पताल के भीतर हुआ वहाँ अफरा-तफरी मच गई।
जनरल हुड्डा ने कहा, "जहाँ तक मेरी रिपोर्ट का सवाल है, AFSPA का उसमें कोई उल्लेख नहीं है और न ही वहाँ (कश्मीर) घाटी में आवश्यक सैनिकों की संख्या का कोई जिक्र है।"