यह दूसरा मजहब यदि सचमुच सहिष्णु है तो तत्काल कम से कम काशी और मथुरा के मंदिरों को खुद खाली करे और हिंदुओं के साथ वहाँ भव्य मंदिर बनवाए। बाकी, 30 हज़ार मंदिरों की तो बात भी नहीं हुई है….
चिंता का विषय यह है कि इन लोगों ने उन छात्रों को भी शिक्षित किया जो भविष्य में सैकड़ों लोगों को शिक्षित करेंगे। यह हमारी शिक्षा की स्थिति की एक भयानक तस्वीर को उजागर करता है। इससे यह बात भी स्पष्ट हो जाती है कि वर्तमान सरकार को प्राथमिकता के आधार पर छात्रों को पढ़ाए जाने वाले इतिहास के पाठ्यक्रम में संशोधन की आवश्यकता क्यों है?
असदुद्दीन ओवैसी ने हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि बाबरी मस्जिद अवैध थी, तो इसे ढहाने को लेकर लालकृष्ण आडवाणी पर मुकदमा क्यों चल रहा है और अगर यह वैध थी, तो आडवाणी को जमीन क्यों दी जा रही है?
VHP के नेताओं ने भी संतों द्वारा सुझाई गई दो तारीखों पर अपनी सहमति दी है और कहा कि उनके द्वारा सुझाई गईं तारीख़ों से बेहतर और कोई तारीख़ नहीं हो सकती। कुल मिलाकर अब सरकार पर भी दबाव रहेगा कि वो जल्द ही ट्रस्ट बनाए और इसमें संतों के प्रमुख वर्गों को शामिल करें।
एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि यदि शिवसेना को हमारा समर्थन चाहिए तो उसे बीजेपी के साथ सारे रिश्ते तोड़ने का ऐलान करना होगा। और अब अरविंद सावंत के केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे के ऐलान के साथ ही यह साफ हो गया है कि शिवसेना ने एनडीए छोड़ने का मन बना लिया है।
ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मोहम्मद आमिर ने कहा कि मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को जो जमीन दी जा रही है, वो खैरात नहीं, बल्कि मुआवजा है।
सुजाता ने 'नेशनल हेराल्ड' में लिखा कि आडवाणी के साथ जब भी कुछ बुरा होता है तो उन्हें ख़ूब ख़ुशी होती है। साथ ही वो नरेंद्र मोदी पर आडवाणी के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाना भी नहीं भूलीं।
श्रीराम के जन्म को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हिन्दुओं की आस्था पर मुहर लगा दी। इसके पीछे कई कारण रहे, जिनमें से एक कारण भगवान विष्णु भी हैं। वही विष्णु, जिन्होंने श्रीराम के रूप में अवतार लेकर सरयू तट को पवित्र किया। जब वो ख़ुद बोलें तो भला कौन न माने?
Stan (अगर H को साइलेंट कर दें तो, जो कि टेलिग्राफ के संपादक की मंशा भी थी, तभी उसने इसे ब्रेक करके हेडलाइन बनाई) का अर्थ शैतान होता है। खैर... शायद इन्हें नहीं पता लेकिन ये हेडलाइन बनाते-बनाते खुद हेडलाइन बन जाएँगे, JNU से गायब होते वामपंथियों की तरह।
हास्यास्पद यह है कि जितनी भीड़ वामपंथियों ने विरोध के लिए जुटाई थी और जितनी ऊँची आवाज में वो विरोध कर रहे थे, उससे कहीं अधिक जय श्री राम के नारे की गूँज सुनाई दे रही थी। वीडियो में वामपंथी विरोध की दम तोड़ती आवाज को सुनिए और मजे लीजिए।