“बीजेपी रोटेशन आधारित सीएम पद के लिए सहमत नहीं होगी। उपमुख्यमंत्री का पद शिवसेना को दिया जा सकता है। आदित्य ठाकरे के लिए उपमुख्यमंत्री पद पर शिवसेना को मान जाना चाहिए। फडणवीस मुख्यमंत्री का पद सँभाले।”
"बकरा ईद पर, वे हमें अपना दरवाज़ा खुला रखने के लिए मजबूर करते हैं और वे हमारे घर के सामने बकरियों का वध करते हैं। लेकिन, मैंने कभी कुछ नहीं कहा क्योंकि यह उनका त्योहार है। क्योंकि हम हिन्दू हैं, हमारा मज़ाक उड़ाया जाता है, दबाव डाला जाता है और ऐसी स्थिति बनाई जाती है कि हम जल्द ही इस क्षेत्र को छोड़ दें।"
कॉन्ग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि सभी भारतीय चाहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में हो। उन्होंने यह भी कहा कि अगर आप किसी मुस्लिम भाई से भी पूछेंगे तो वह भी अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर कहेगा कि राम मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो कहाँ बनेगा?
आज के शपथ ग्रहण में सिर्फ सीएम और डिप्टी सीएम ने ही शपथ ली है। हालाँकि, पहले कैबिनेट मंत्रियों के भी शपथ-ग्रहण की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
"सितंबर 2010 में जब राम जन्मभूमि पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। जरा उन दिनों को याद कीजिए, कैसा माहौल था। भाँति-भाँति के कितने लोग मैदान में आ गए थे। कैसे-कैसे 'इंटरेस्ट ग्रुप' उस माहौल का अपने-अपने तरीके से फायदा उठाने के लिए खेल खेल रहे थे....."
पीएम नरेंद्र मोदी ने दिवाली के लिए ट्वीट कर शुभकामनाएँ दी। उन्होंने लिखा, “देशवासियों को दीपावली के पावन अवसर पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। रोशनी का यह उत्सव हम सभी के जीवन में नया प्रकाश लेकर आए और हमारा देश सदा सुख, समृद्धि और सौभाग्य से आलोकित रहे।”
पीएम मोदी ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि भारत के प्रथम गृह मंत्री के रूप में सरदार वल्लभभाई पटेल ने रियासतों को एक करने का एक बहुत बड़ा भगीरथ और ऐतिहासिक काम किया। सरदार वल्लभभाई पटेल की ये ही विशेषता थी जिनकी नज़र हर घटना पर टिकी थी।
27 अक्टूबर सुबह ट्रंप ने ट्वीट करते हुए किसी बड़ी घटना के होने की जानकारी देते हुए सभी को चौंका दिया। इसी दौरान खबर है कि इस्लामिक स्टेट के सरगना बगदादी के खिलाफ अमेरिका ने कार्रवाई शुरू करते हुए, उसे मार गिराया है।
उत्तराखंड में दीपावली के 11 दिन या एक माह बाद माने जाने के पीछे एक और मान्यता बताई जाती है। कहा जाता है कि गढ़वाल क्षेत्र में भगवान राम के अयोध्या पहुँचने की खबर दीपावली के ग्यारह और कुछ स्थानों में एक माह बाद मिली और इसीलिए ग्रामीणों ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए बाद दीपावली का त्योहार मनाया था और इसी परंपरा को निभाते गए।
क्षेत्र विशेष तक सीमित शिव सेना को एहसास है कि हालिया उभार मोदी की लोकप्रियता की बदौलत है। भाजपा से अलग होने का नतीजा भी वह 2014 के विधानसभा और 2017 के बीएमसी चुनाव में भुगत चुकी है। देर-सबेर उसका लौटना तय है। तब तक उसके राजनीतिक फुफकार के मजे लीजिए!