मुनव्वर राना ने भगवान वाल्मीकि से तालिबान की तुलना करते हुए कहा कि वाल्मीकि का जो इतिहास था, उसे तो हमें निकालना पड़ेगा न। उन्होंने कहा कि आपके मजहब में किसी को भगवान कह देते हैं।
33 वर्षीय खटेरा को पिछले वर्ष तालिबानियों ने आँख में चाकू मार कर हमेशा के लिए अंधा बना दिया था। उनकी गलती बस ये थी कि वो घर से निकल कर जॉब करने जाती थीं।
भारतीय लिबरलों का आचरण इस बात को बल देता है कि आज इस्लामिक आतंकवाद के साथ वैचारिक कन्धा मिलाकर खड़ा होने में जिन्हें शर्म नहीं, वे भविष्य में सामरिक कंधा देने के लिए खड़े हो जाएँ तो आश्चर्य न होगा।
जब राष्ट्रपति भाग चुके हैं, फौज घुटने टेक चुकी है, अफगान नागरिक किसी भी तरह मुल्क से निकलना चाहते हैं, सालेह ने तालिबान के आगे झुकने से इनकार कर दिया है। पर क्या वे खुद को 'पंजशीर का नया शेर' साबित कर सकेंगे?