जनता कर्फ्यू के दिन घंटी-थाली बजाने पर पड़ोस में ही रहने वाले 7-8 मुस्लिम युवकों ने मृतक रेवत सिंह (रेवंत सिंह के घर जाकर उनके साथ धक्का-मुक्की करते हुए कहा था कि यहाँ किसी मोदी का नहीं, बल्कि उनका कानून चलता है। जैसा वो कहेंगे उन्हें मानना होगा।
ट्रेन में हुई सागर नामक व्यक्ति की हत्या के आरोपितों के मुस्लिम होने की खबर में कितनी सच्चाई है? क्या बुरका पहनी औरतों के साथ चल रहे पुरुषों ने ली उसकी जान? जानिए क्या है सच।
ग्रामीणों ने जब बबलू और प्रकाश को एक गाड़ी में पशुओं को ले जाते देखा तो उन्हें शक हुआ और उन्होंने गाड़ी रुकवाकर दोनों से पूछताछ की। जब दोनों के जवाब से वहाँ मौजूद लोग संतुष्ट नहीं हुए तो पहले उनकी गाड़ी में आग लगाई गई, फिर उन्हें इतना मारा गया कि...
कृष्णा के हाथ में नहीं है गोदना। गोदना देखकर ही पत्नी ने की थी शव की पहचान। इस घटना का हवाला देकर मीडिया गिरोह ने मॉब लिंचिंग पर चिंता जताई थी। दावा किया था कि कारवाँ-ए-मोहब्बत ने पीड़ित परिवार के लिए फंड जुटाए थे।
देखते ही देखते कहासुनी मारपीट में तब्दील हो गई और नशे में धुत लोगों ने अजय दास पर अपनी लाठी और डंडों से हमला बोलकर उसे बुरी तरह ज़ख़्मी कर दिया और लहू-लुहान हालत में छोड़कर भाग गए।
भीड़ में क़रीब 20 संदिग्ध लोग शामिल थे, जिन्होंने पटाखे उड़ाने से मना किया। जवाब में अमरेश व उनके दोस्तों के साथ उनकी कहासुनी हो गई। इसके बाद एक ने अमरेश के दोस्त की कनपट्टी पर बन्दूक रखा और अन्य ने धारदार हथियारों से हमला कर दिया।
22 अक्टूबर से इस मामले की सुनवाई फिर से शुरू हो गई है। इतने पुराने मामले के गुनहगार शायद ही मिलें। लेकिन, इसने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। क्या इतने पुराने मामले दोबारा खोले जाने चाहिए?