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कृषि बिल पर राज्यसभा ने ध्वनिमत से लगाई मुहर, PM मोदी ने कहा- करोड़ों किसान सशक्त होंगे

विपक्षी सांसदों के जोरदार हंगामे के बीच राज्‍यसभा ने कृषि विधेयकों को पारित कर दिया है।

जम्मू-कश्मीर: बिजली-पानी बिल हाफ, कारोबारियों के लिए ₹1350 करोड़ का पैकेज

जम्मू-कश्मीर के कारोबारियों के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 1,350 करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है।

‘आपसे उम्मीद की जाती है कि निष्पक्ष रहो’: NDTV पत्रकार श्रीनिवासन को व्यवसायी राकेश झुनझुनवाला ने सिखाया नैतिकता का पाठ

साक्षात्कार के दौरान झुनझुनवाला ने एनडीटीवी पत्रकार और उनके मीडिया हाउस को मोदी से घृणा करने वाला बताया। उन्होंने पत्रकार से कहा, "आप सिर्फ़ सरकार की आलोचना करते हो।"

किसानों का विकास, बाजार का विस्तार, बेहतर विकल्प: मोदी सरकार के तीन विधेयकों की क्या होंगी खासियतें

मोदी सरकार ने तीन नए विधेयक पेश किए हैं ताकि कृषि उत्पादन के लिए सरल व्यापार को बढ़ावा मिले और मौजूदा एपीएमसी सिस्टम से वह आजाद हों, जिससे उन्हें अपनी उपज बेचने के और ज्यादा विकल्प व अवसर मिलें।

राहुल ‘पलटू’ गॉंधी: घोषणा पत्र में जो किया वादा, कृषि बिल में उसका ही कर रहे विरोध

2019 के लोकसभा चुनावों में, कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक चुनावी घोषणा पत्र जारी किया था, जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कॉन्ग्रेस पार्टी यदि कभी सत्ता में आती है तो वह कृषि उपज मंडी समितियों के अधिनियम में संशोधन करेगी।

‘आपने बुलाया है तो आ जाऊँगा लेकिन मेरे पास गाड़ी नहीं है’ – वो मोदी, जो PM नहीं थे लेकिन वचन के पक्के थे

चर्चा से कुछ देर पहले खूब बारिश। सिग्नल खराब। लेकिन वह वादा कर चुके थे, इसलिए काफी देर इंतज़ार करने के बावजूद भी चर्चा में शामिल हुए।

नरेंद्र मोदी: यह नाम लेते ही आपके जेहन में कैसी तस्वीर उभरती है?

नरेंद्र मोदी, यानी एक ऐसा नेता जो कोई भी बड़ा निर्णय ले सकता है, चाहे विकास के एजेंडे पर हो या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा।

प्रधानमंत्री मोदी ने वेतन से ₹2.25 लाख दान कर की थी ‘पीएम केयर्स फंड’ की शुरुआत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स फण्ड की शुरुआत अपनी बचत के 2.25 लाख रुपये दान देकर की थी। ये रकम पीएम ने अपनी तनख्वाह से चुकाई थी।

किसानों को MSP से भी ज्यादा कीमत… लेकिन ‘गैंग’ बना रहा भय का माहौल, कर रहा खेतिहरों का नुकसान

"एक देश एक मार्केट" - मार्केट में जितनी प्रतिस्पर्धा, किसान-व्यापारी को उतनी अच्छी क़ीमत। किसान फसल को अपने या दूसरे प्रदेश में बेच सकता है।

कोरोना के बीच बेरोजगारी पर सरकारों को घेरना कितना उचित?

जुलाई में 50 लाख सैलरी वाले लोगों की नौकरी जाने का अंदाजा लगाया गया है, जो कि पूरे कोविड आपदा के दौरान दो करोड़ तक कही जा रही है। ये आँकड़े अच्छे नहीं हैं। न ही इसे किसी भी तर्क से सही कहा जा सकता है।

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