भारत आपदा में रोने वाला देश नहीं है, बल्कि संकट को अवसर में बदलने के लिए गंभीर है। उन्होंने बताया कि कैसे हम आयात पर निर्भरता कम करेंगे और युवाओं को रोजगार देकर भारत को मजबूत बनाएँगे।
इस तरह देखें तो लॉकडाउन की वैसे तो कोई ठीक-ठीक परिभाषा मौजूद नहीं है, लेकिन आमतौर पर संक्रमण को रोकने के लिए सरकारें इस तरह के कदम उठाती हैं। लॉकडाउन में सरकार का लक्ष्य यह होता है कि लोग यहाँ-वहाँ कम आएँ-जाएँ। जनता का आवागमन बाधित हो, जिससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
"कॉन्ग्रेस के एक नेता ने कहा कि यह फैसला देश को बर्बाद कर देगा। 3 महीने हो गए हैं, क्या देश बर्बाद हो गया? एक और कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि 370 हटाकर हमने कश्मीर को खो दिया है। क्या हमने कश्मीर खो दिया है?"
जैसा अपेक्षित था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण में वैश्विक चिंताओं पर गंभीरता दर्शाते हुए बगैर नाम लिए पाकिस्तान और उसे आँख बंद कर समर्थन देने वाले चीन पर भी निशाना साधा। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंक के खिलाफ भारत की आवाज में दुनिया को सतर्क करने की गंभीरता भी है और आक्रोश भी।
“मुस्लिम समाज में एक से अधिक पत्नी रखने की धार्मिक ‘छूट’ है। इसलिए ‘हम पाँच हमारे पच्चीस’ की जनसंख्या बढ़ाने वाली जो फैक्ट्री शुरू थी, उस फैक्ट्री पर ‘तालाबंदी’ घोषित कर दी गई।”
"बच्चे के जन्म से पहले उसकी जरूरत के बारे में जरूर सोचें। शिक्षित वर्ग ऐसा ही करता है। स्वयं की प्रेरणा से अगर आप परिवार सीमित रखते हैं तो ना सिर्फ आपका बल्कि देश का भी भला होता है और यह भी एक तरह की देशभक्ति है।"
पीएम नरेंद्र मोदी ने यह भी कहा कि कॉन्ग्रेस समान नागरिक संहिता और शाहबानो मामले से चूक गई, आज फिर एक अवसर आया है, हम महिला सशक्तीकरण के लिए एक विधेयक लाए हैं, कृपया इसे धर्म से न जोड़ें।
उसी भविष्य में मत जाओ जहाँ तुमने 2014 की मई में कहा था कि अब तो सड़कों पर हिन्दू नंगी तलवारें लिए दौड़ेंगे, अल्पसंख्यकों को तो काट दिया जाएगा, गली-गली में दंगे होंगे, मस्जिदों का तोड़ दिया जाएगा, उनकी
बस्तियों पर बम गिराए जाएँगे… और वैसा कुछ भी नहीं हुआ