उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रियंका गाँधी के प्रवासी मजदूरों को लिए एक हजार बसें चलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यूपी के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अवनीश अवस्थी ने प्रियंका गाँधी को पत्र लिखकर बिना किसी देरी के एक हजार बसों और ड्राइवरों का विवरण माँगा है।
ग्रीन जोन में शामिल अमेठी में कॉन्ग्रेस की वजह से कोरोना का पहला मरीज सामने आया है। अमेठी के डीएम अरुण कुमार ने इस मामले में खुलासा करते हुए बताया कि......
“2 करोड़ रुपए, जिसे राणा कपूर ने प्रियंका गाँधी को पेंटिंग के बदले दिया, वह कपूर के अकाउंट में कुछ समय पहले ही आए थे। इस कारण से ये मामला उनके लिए जाँच का विषय है और इसी वजह से खरीददार और देनदार दोनों पर PMLA एक्ट की धारा 3 के कार्रवाई हो सकती है।”
मध्य प्रदेश की सियासत का संदेश स्पष्ट है। भले जितनी मजबूत राजनीतिक विरासत मिले, निर्णायक जमीनी पकड़ ही है। यही कारण है कि कॉन्ग्रेस तमाम जतन के बावजूद अपनी सरकार बचाने में नाकाम रही। वरना विरासत की राजनीति तो कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार के चिरागों को भी मिली हुई है।
उस पेंटिंग में ऐसा क्या था कि मिलिंद देवड़ा चाहते थे कि 'यस बैंक' के तत्कालीन सीईओ राणा कपूर उसे प्रियंका गाँधी से 2 करोड़ रुपए में ख़रीदें? उस दौरान मिलिंद, राणा और प्रियंका में क्या-क्या बातचीत हुई, उसकी पूरी डिटेल्स यहाँ देखें। बदले में राणा ने भी एक बड़ी माँग रखी थी।
अमित मालवीय ने भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या के सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के संबधों का भी जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि एक अन्य भगोड़ा कारोबारी नीरव मोदी की ब्राइडल ज्वेलरी कलेक्शन का उद्घाटन राहुल गाँधी ने किया था और अब राणा कपूर से प्रियंका गाँधी के तार जुड़ते नज़र आ रहे हैं।
यस बैंक घोटाले से कॉन्ग्रेस और गॉंधी परिवार के लिंक मिले हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बैंक के फाउंडर राणा कपूर के गाँधी परिवार से घनिष्ठ संबंध थे। उन्होंने 2 करोड़ रुपए में प्रियंका गाँधी की एक पेंटिंग खरीदी थी। यह खुलासा ईडी द्वारा कपूर से की गई लगभग 30 घंटे की पूछताछ से हुआ।
कॉन्ग्रेस महासचिव निकली थीं योगी सरकार को घेरने। लेकिन, सोशल मीडिया में खुद ही घिर गईं। यूजर्स ने झट से उनके झूठ को पकड़ लिया। वैसे कॉन्ग्रेस नेताओं के लिए ऐसी हरकतें नई नहीं है। वे वो पहले भी इस तरह से झूठ फैलाते पकड़े जा चुके हैं।
...अगर गृह मंत्रालय नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो के प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो गाँधी परिवार को हवाई अड्डे की सुरक्षा से आम नागरिक की तरह गुजरना होगा और घरेलू या अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सवार होने के लिए अन्य यात्रियों के साथ कतार में खड़ा होना होगा।