थरूर का कहना है कि कुछ पार्टी नेता नहीं चाहते कि वे चुनाव लड़ें। नामांकन वापस लेने के लिए उन पर दबाव बनाने के मकसद से ये नेता राहुल गाँधी से भी मिले थे।
राहुल गाँधी जिन्हें दिल्ली में 'मोदी का यार' बताते हैं, कॉन्ग्रेस की सरकारें अपने प्रदेश में उनकी ही एजेंट बनी हुई हैं। यही हसदेव अरण्य का दुर्भाग्य है।