सोशल मीडिया में एक तस्वीर बड़ी तेज़ी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में 72 वर्षीय शिया मौलवी असद रज़ा हुसैनी के एक हाथ पर प्लास्टर चढ़ा हुआ है और शरीर पर घाव के निशान हैं। सहानुभूति बटोरती इस तस्वीर का एक दूसरा पहलू भी है, जो दंगाइयों, मीडिया-सोशल मीडिया गिरोह के प्रोपेगेंडा को उजागर करती है।
"हिंसा किसने शुरू की, इसकी जाँच होनी चाहिए, क्योंकि कौन जानता है कि आगजनी किसने शुरू की। आप बिना जाँच के कैसे कार्रवाई कर सकते हैं? पहले यह पता करें कि हिंसा किसने शुरू की?"
पाकिस्तान की अनीला एहसान ने पैगंबर मुहम्मद पर सवाल उठाकर वहाँ के कट्टरपंथियों को बैठे-बिठाए एक मुद्दा दे दिया। अब उन्हें इस्लामिक क़ानून के अनुसार, 'ईशनिंदा' के आरोप का सामना करना पड़ सकता है।
वायरल हुए इस वीडियो के पीछे के प्रोपेगेंडा को समझना है तो इसे किन हस्तियों द्वारा कैसे शेयर किया गया, ये देखें। इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने लिखा, "ओह यस- उनके कपड़ों को देखकर आप बता सकते हैं कि वो कौन हैं।"
“आपने मुझसे बातचीत बंद क्यों कर दी?” इसके जवाब में मंत्री कहते हैं, “नहीं कुछ नहीं जी, अल्लाह मालिक है।” यहाँ तक बात बड़े रोमांटिक टोन में हो रही थी। लेकिन अचानक से TikTok स्टार ने अपना टोन कड़ा कर बोला, "क्या अल्लाह मालिक है, आप नंगा होके मुझे दिखाते थे, तब..." इतना सुनते ही मंत्री के तोते उड़ गए।
ऐसे समय में जब विश्व के लगभग सभी देशों ने पाकिस्तान का साथ छोड़ दिया है। उस समय चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा साझेदार है और शाहिद अफरीदी का चीन के खिलाफ़ बोलना और प्रधानमंत्री इमरान खान को इस मुद्दे पर बोलने के लिए उकसाना उन्हें महंगा पड़ सकता है।
दिल्ली पुलिस ने फर्जी वीडियो और लेटर के जरिए अफवाह फ़ैलाने वालों के खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया है और मुखर्जी नगर के लोगों से अपील की है कि वह सोशल मीडिया पर ऐसे फर्जी पोस्ट पर ध्यान ना दें।
1. जामिया नगर में पुलिस प्रदर्शनकारियों को जान से मार रही है। 2. सीलमपुर में प्रदर्शनकारियों के ऊपर पुलिस बर्बरता दिखा रही, जान से मार रही। - ये वो दो न्यूज और वीडियो थे, जो फेक थे लेकिन जिस समय इन्हें फैलाया गया, उससे हिंसा भड़की और...
जानकी ने अपने निबंध में लिखे कुछ वाक्यों को शेयर किया। साथ ही बहार की किताब का स्क्रीनशॉट भी ट्वीट में डाला। हैरानी की बात यह थी कि जानकी के आर्टिकल और बहार की किताब में लिखे शब्दों में कोई फर्क नहीं है।
उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि कि हमारे मुस्लिम में उतना पढ़ा-लिखा समाज नहीं है। इसके आगे उन्होंने कहा कि मुस्लिम
गुमराह हैं और इसलिए वो विरोध-प्रदर्शनों का हिस्सा बन जाते हैं और हाथ में हथियार उठा लेते हैं।