हमलावर पुलिस मुख्यालय में ही कार्यरत था और बताया जा रहा है कि हमलावर ने हाल ही में इस्लाम धर्म अपनाया था। फ़िलहाल, हमलावर को पुलिस ने गोली मारकर ढेर कर दिया।
सीमा पर सुरक्षा बल की तैनाती से आतंकियों का प्लॉन ए और बी में नाकामयाब हो गया है, इसलिए अब वह नवरात्रि में धार्मिक स्थल पर दंगे करवाकर माहौल खराब करने की कोशिश में है। साथ ही घुसपैठ के जरिए प्लॉन बी को भी कामयाब करने की कोशिशों में हैं।
आतंकियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने अब तक सीलमपुर और उत्तर पूर्वी दिल्ली के 2 स्थानों एवं जामिया नगर और सेंट्रल दिल्ली के पहाड़गंज स्थित 2 जगहों पर छापेमारी की है। इसके अलावा 2 लोगों को पूछताछ के लिए भी हिरासत में लिया गया है।
शफी और 5 अन्य लोग मसूद अहमद मट्टू, मोहम्मद मुजफ्फर शाह, गुलाम मोहम्मद, तौसीफ अहमद गंडना और सैयद अहमद का नाम एफआईआर (संख्या: 229/2019) में शामिल है और उन पर हिजबुल मुजाहिदीन के सक्रिय आतंकवादियों को शरण देने और उनकी आवाजाही की व्यवस्था को अंजाम देने का आरोप है।
शुरुआती जाँच में खुलासा हुआ है कि 200 रुपए देकर एक महिला ने बिलावर से बस के ड्राइवर को विस्फोटक का पैकेट दिया था और कहा था कि इसे बस स्टैंड पर एक व्यक्ति के हवाले करना है।
"क्या पाकिस्तान यह स्वीकार करेगा कि वो दुनिया की एकमात्र सरकार है, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित सूची में सूचीबद्ध अल-क़ायदा और दाएश के आतंकियों को पेंशन प्रदान करता है? पाकिस्तान वो देश है, जहाँ अल्पसंख्यक समुदाय 1947 में 23% से घटकर अब 3% तक रह गया है।"
सऊदी राजदूत डॉक्टर सऊद बिन मोहम्मद अल सती ने कहा कि सऊदी अरब, भारत को एक घनिष्ठ दोस्त और 'रणनीतिक साझेदार' के रूप में महत्व देता है। दोनों देशों के बीच रक्षा तथा सुरक्षा सहयोग को और अधिक बढ़ाया जाएगा।
चाहे वो मोदी हों, मर्कल हों, मैक्राँ हों, जॉनसन हो या कोई वैसा राष्ट्र जो यह नहीं चाहता कि उसके किसी एयरपोर्ट पर, चर्च में, सड़क पर, पार्क में, मंदिर पर या बस-ट्रेन में बम फूटे, छुरा चले, ट्रकों से लोगों को रौंदा जाए, तो सबसे पहला काम तो वो यह करें कि एक स्वर में इस मुसीबत को उसके पूरे नाम से स्वीकारें कि हाँ, कट्टरपंथी आतंकवाद ने इन सारे देशों में दहशत फैलाई है, जानें ली है, परिवारों को तोड़ा है।
साल 2003 में 3 नेताओं की हत्या की साजिश रची गई थी। साजिश के तहत भाजपा नेता हरेन पांड्या की हत्या कर दी गई जबकि वीएचपी के दो नेता जयदीप पटेल और जगदीश पटेल बच गए थे। इसके लिए वहाब ने धन मुहैया कराया था।