केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास BAT के हमले को नाकाम करते हुए भारतीय सेना ने पाँच-सात घुसपैठिए मार गिराए। पाँच-सात पाकिस्तानी सेना के जवान/ आतंकवादी के शव अब भी एलओसी पर पड़े हैं। सेना ने सबूत के तौर पर चार शवों की सैटेलाइट तस्वीरें भी जारी की है।
हमले को अंजाम देने के लिए गुलाम कश्मीर के नेजापीर सेक्टर से जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी घुसपैठ की फिराक में हैं। इसके अलावा श्रीनगर-बारामुला-उरी हाइवे पर सेना के काफिले को भी आईईडी धमाके से निशाना बनाने की योजना थी।
पाकिस्तान के अंदर कई मदरसे न केवल वैचारिक प्रचार के केंद्र के रूप में कार्य करते हैं, बल्कि सभी प्रकार की आतंकी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षण भी प्राप्त करते हैं, जो धीरे-धीरे आतंकियों के लिए धन इकट्ठा करने वाले समूहों में तब्दील हो जाते हैं।
चिनार कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने J&K की सभी माताओं से अनुरोध के स्वर में कहा कि अगर आज आपका बच्चा 500 रुपए के लिए पत्थरबाजी करता है, तो वह कल आतंकवादी बन जाएगा और संभवत: एक साल के भीतर मारा जाएगा।
लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने पत्रकारों को बताया कि आतंकवादियों के पास से पाकिस्तान सेना की लैंडमाइंस बरामद की गई है। इससे साबित होता है कि कश्मीर में आतंकवाद के पीछे पाकिस्तानी सेना का हाथ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कश्मीर में सुरक्षा बल अब तक के सबसे सफल तरीके से आतंकियों से निपट रहे हैं। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। इसलिए, मोदी सरकार आतंकियों के हमदर्द से भी सख्ती से निपट रही है।
इससे पहले की बात आगे बढ़ती आमिर ने उस ट्वीट को अनलाइक कर दिया। लेकिन ऐसा करना उनके लिए कारगर साबित नहीं हो सका क्योंकि तब तक कई यूज़र्स ने मोहम्मद आमिर का यह स्क्रीनशॉट ले लिया था। अब यह स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
आरोपित सौरभ शुक्ला लगातार फोन और इंटरनेट के जरिए पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठन के आकाओं के संपर्क में रहता था। साथ ही इनसे अलग-अलग बैंक खाताओं में पैसे मंगवाकर आतंकियों तक सप्लाई करता था।
सुरक्षाबलों ने आतंकियों को कुत्ते की मौत दे दी। अब, जबकि वो मार गिराए गए हैं और भारत सरकार की नई जीरो टॉलरेंस नीति के हिसाब से साल के दो सौ आतंकी निपटाए जा रहे हैं, तो इससे कई सकारात्मक बातें सामने आती हैं........
उस दिन मंदिर के महाप्रसाद को 40 हजार से ज्यादा लोगों ने खाया था। दहशतगर्दों की साजिश थी कि महाप्रसाद में जहर मिलाकर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की जान ली जा सके।