दुबई में दिवाली समारोह के इस अनूठे कार्यक्रम में काफ़ी संख्या में लोग मौजूद थे। जैसे ही पुलिस बैंड ने लोगों के लिए ‘जन-गण-मन’ बजाया, भीड़ खड़ी हो गई और जब राष्ट्रगान ख़त्म हुआ उस वक़्त लोगों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई, वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा।
दिलचस्प यह है कि भले ही इसके उद्घाटन की तारीख 9 नवंबर की रखी गई है लेकिन सोशल मीडिया पर करतारपुर कॉरिडोर की चमचमाती झलक देखने को मिल गई है। ट्विटर पर बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने कॉरिडोर की वीडियो डाली है और...
".......इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता कि वे एक काबिल व्यक्ति थे जिन्होंने आजादी की लड़ाई में महत्तवपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने दलितों के अधिकार की लड़ाई लड़ी और देश के लिए जेल गए।"
"बेहद प्यारा! निहाल को मेरा आशीर्वाद। वह भविष्य में जो भी करे, उसके लिए शुभकामनाएँ। मुझे पूरा विश्वास है कि उसे आपके रूप में एक अच्छा गुरु और गाइड मिलेगा।"
इस 3 मिनट की वीडियो में प्रधानमंत्री बीच पर कैजुअल कपड़ों में नजर आ रहे हैं। उन्होंने टीशर्ट और ट्रैक पैंट पहनी है और सैर के दौरान वे समुद्र किनारे पड़े कूड़े को अपने हाथ से उठा रहे हैं।
कम्पनी ने यूजर्स को आश्वस्त किया है कि जल्द ही इन खामियों को दूर कर लिया जाएगा। बता दें कि ट्वीटडेक का प्रयोग किसी ट्वीट को किसी निश्चित समय पर शेड्यूल करने के लिए किया जाता है। अधिकतर न्यूज़ पोर्टल्स भी समय-समय पर ट्वीट शेड्यूल कर लोगों तक ख़बरें पहुँचाते हैं।
आदित्य राज कौल इस ट्वीट पर दो टूक कहते हैं कि पाकिस्तान, मलेशिया और तुर्की इंसानियत और आतंकवाद की लड़ाई को लेकर बिलकुल चिंतित नहीं हैं, अब इस्लामिक प्रोपेगेंडा और नफरत फैलाने के लिए हमारे पास एक और मुखपत्र आ गया है। आदित्य ने अपने ट्वीट में पूछा है कि क्या इस मुस्लिम चैनल के संपादक जाकिर नाइक होने वाले हैं?
पाकिस्तान गधों को चीन को बेचकर, जहाँ उन्हें मारकर उनके चमड़े से पारंपरिक चीनी दवाएँ बनाने के लिए उनकी हमेशा माँग बनी रहती है, पाक अपना विदेशी कर्ज पाटने की उम्मीद पाले है। यही नहीं, अपनी बदहाल अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए पाकिस्तान इसके पहले बालों का निर्यात भारी मात्रा में करने का भी काम कर चुका है।
इन अकॉउंट्स से पोस्ट होने वाले ट्वीट में अधिकतर मानवाधिकारों का हनन करने वाली वीडियो और नागरिकों एवं सेना में होने वाला संघर्ष दिखाया जाता था। इनमें ज्यादातर ट्वीट अनुच्छेद 370 और कश्मीर से संबंधित थे।
"अगर इमरान खान को समर्थन मिला होता तो अब तक ये सबको पता चल चुका होता, क्योंकि वो UNHRC की कोई गुप्त बैठक नहीं थी। पाकिस्तान का समर्थन करने वाले देशों के जॉइंट स्टेटमेंट की जो सूची वो जारी करने वाले हैं, वैसी कोई सूची अभी तक हमें नहीं मिली है।"