"हिन्दू राष्ट्रवादी मेरे पुराने विडियो क्लिप को निकाल हंगामा मचा रहे हैं। भारत में अभी फासिज्म का वातावरण तैयार हो रहा है। जो इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाता है, उसे बदनाम होने, ट्रोल किए जाने, जेल में भेजे जाने और पिटाई किए जाने का डर है।"
गोंजाल्विस के पास मिली एक सीडी के नाम में ही 'राज्य के दमन का विरोध' था। मार्क्सिस्ट आर्काइव्स, वार एंड पीस इन जंगलमहल, अंडरस्टैंडिंग माओइस्ट, आरसीपी रीव्यू वगैरह भी बरामद की गईं। अदालत ने गोंजाल्विस से पूछा की ये किताबें और सीडी उनके घर में क्या कर रही थीं?
नक्सली नेता कोबाड गाँधी को 9 साल पुराने देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया है। झारखंड की हजारीबाग जेल में निरुद्ध प्रतिबंधित माओवादी संगठन के सदस्य कोबाड गाँधी को सोमवार को ट्राँसफर वारंट पर सूरत लाया गया था।
भीमा कोरेगाँव की जाँच के दौरान पुणे पुलिस को आरोपित रोना विल्सन और सुरेंद्र गण्डलिक के लैपटॉप से कुछ अहम दस्तावेज मिले हैं। गौतम नवलखा और कुछ नक्सल समूह साल 2011 से ही पाकिस्तानी आंतकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन से सपर्क में थे। इसके अलावा साल 2011 से 2014 के बीच मे गौतम कश्मीर के अलगाववादी नेता सैय्यद अली शाह गिलानी और शकील बख्शी के भी सम्पर्क में थे।
अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार शहरी नक्सलियों और माओवादियों के प्रति किसी भी मुरौव्वत के मूड में नहीं है। उन्होंने यह भी बयान दिया कि सच में सामाजिक कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं को पकड़ने में पुलिस की कोई रुचि नहीं है।
राव को बीते साल नक्सलियों से संपर्क रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। वह पुणे की यरवदा जेल में बंद था। इस मामले में राव सहित 23 लोगों के खिलाफ पुणे पुलिस ने मामला दर्ज कर रखा है। राव पहली बार तब चर्चा में आया था, जब बीते साल पुलिस ने माओवादियों से संपर्क रखने को लेकर देशभर में कई जगहों पर छापेमारी की थी।
कोरेगांव की लड़ाई की प्रशंसा ब्रिटेन की संसद तक में हुई थी और कोरेगाँव में एक स्मारक भी बनवाया गया था जिस पर उन 22 महारों के नाम भी लिखे हैं जो कम्पनी सरकार की ओर से लड़े थे। यह प्रमाणित होता है कि कोरेगाँव की लड़ाई दलित बनाम ब्राह्मण थी ही नहीं, यह तो दो शासकों के मध्य एक बड़े युद्ध का छोटा सा हिस्सा मात्र थी।
इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि उनका ताज़ा बयान एमनेस्टी से पैसे लेकर उसके द्वारा गढ़ी गई फ़र्ज़ी स्क्रिप्ट पढ़कर देश का माहौल ख़राब करने और विरोधियों को फ़र्ज़ी मुद्दा थमाने का हो।