“नरेन्द्र मोदी ने गरीबी मिटाने, शिक्षा व्यवस्था सुधारने, लड़कियों-महिलाओं सशक्त करने और जलवायु परिवर्तन का सामना करते हुए भारत की आर्थिक क्षमताओं को बढ़ाने के लिए महात्वाकांक्षी नज़रिया पेश किया।"
अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश को इससे कोई आपत्ति नहीं थी, लेकिन एक अमेरिकी सीनेटर ने ऐन समय पर वीटो लगा कर कहा कि अगर रूस भारत के साथ इस करार को करता है तो फिर उसे अमेरिकी सहायता नहीं मिलेगी।
एक ऐसा समय था जब पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के नाम पर अरबों डॉलर मिलते थे। धीरे-धीरे भारत ने उसे बेनकाब करना शुरू किया और अब इस्लामी मुल्क भी उसे लताड़ते हैं।