सामान्य वर्ग (आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों) के लिए 10% रिजर्वेशन के बाद केंद्र सरकार अब इसे धरातल पर उतारने की तैयारी में। दो चरणों (2019-20 और 2020-21) में तीन लाख तक सीटें बढ़ाने का निर्णय।
माना जा रहा है कि आने वाले बजट सत्र में मोदी सरकार इस सन्दर्भ में OBC जातियों में, कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर, उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति को नज़र में रखते हुए उनकी समुचित हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व तय करेगी।
सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय द्वारा इसके नियम एवं शर्तों को अंतिम रूप देने के साथ ही ये क़ानून लागू हो जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब एक हफ़्ता लगने की उम्मीद है
अगर जातिगत आरक्षण से आपको समस्या नहीं है, तो फिर आर्थिक आरक्षण से तो बिलकुल ही नहीं होनी चाहिए क्योंकि जातिगत आरक्षण की जड़ में यही अवधारणा है कि इन जातियों के लोग ग़रीब और वंचित हैं।
अब तक ये इसलिए ख़ारिज होता रहा है क्योंकि संविधान में इसका प्रावधान ही नहीं किया गया था। इस बार संविधान में इसका प्रावधान किया गया है, इसलिए यह संविधान सम्मत है।
देश में केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लोग ही प्रभावित नहीं है, बल्कि वो लोग भी प्रभावित है जिनके जाति प्रमाण पत्र पर जनरल होने का टैग भी लगा हुआ और खाने के लिए रोटी भी नहीं है।