गिरफ्तार किया गया मौलाना खैम रिज्वी तहरीक-लब्बैक नाम के संगठन से जुड़ा है। किले की देखरेख करने वाली अर्ध सरकारी संगठन वर्ल्ड सिटी ऑफ लाहौर अथॉरिटी ने बकरीद के बाद प्रतिमा ठीक कराने की बात कही है।
आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से पाकिस्तान को कुछ सूझ ही नहीं रहा है। वह ऐसे फैसले ले रहा है, जो आत्मघाती साबित हो रहे हैं। सिर्फ सामरिक ही नहीं, आर्थिक मोर्चे पर लिए फैसले भी पाकिस्तान को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
गृह मंत्रालय ने अपने ट्वीट में कहा कि रायटर्स और डॉन में छपी खबरों में इस तरह के दावे किए गए कि श्रीनगर में 10,000 लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। यह पूरी तरह मनगढ़ंत है। श्रीनगर और बारामूला में छिटपुट प्रदर्शन हुए, लेकिन इसमें 20 से अधिक लोग नहीं थे।
ब्रिटिश पीएम को लिखे खत में सांसद ने कहा है, "70% बौद्ध जनसंख्या वाले लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश घोषित करना दिखाता है कि भारत सभी धर्मों व सम्प्रदायों के प्रति सहिष्णु रुख रखता है। लेबर पार्टी हिन्दू-विरोधी और भारत-विरोधी पार्टी बन गई है, जो विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र से हमारे संबंधों को बिगाड़ना चाहती है।"
राज्यपाल सत्यपाल मलिक के अनुसार, लोग बकरीद मना सकें इसके लिए प्रशासन ने राज्य में सभी आवश्यक इंतज़ाम कर लिए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में दो महीने का राशन है, पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी का स्टॉक मौजूद है।
रूस का खुलकर साथ आना पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करने में लगे भारत की कूटनीतिक जीत भी है। बता दें कि भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के अहम प्रावधानों को निरस्त कर विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया है।
अलगाववादियों के लश्कर और हिज्बुल जैसे आतंकी संगठनों के साथ सम्बन्ध सामने आए हैं। ईडी को पता चला है कि अलगाववादियों, आतंकियों व कश्मीरी नेताओं के पास पाकिस्तानी उच्चायोग से भी सीधे फंड पहुँचाया गया।
केन्द्र शासित प्रदेश बनने के बाद देश के अन्य प्रदेशों की विधानसभा की तरह ही जम्मू-कश्मीर विधानसभा का कार्यकाल भी पॉंच साल ही होगा। जब तक गुलाम कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं बनता सदन की 24 सीटें खाली रहेंगी। यूटी लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी।
जम्मू-कश्मीर की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर करती है। जानकारों का मानना है कि अनुच्छेद-370 में संशोधन के बाद सरकार द्वारा पैसा भेजने में तेज़ी आएगी क्योंकि वहाँ की शासन व्यवस्था अब सीधे केंद्र के हाथों में है।
तालिबान ने कश्मीर को अफ़ग़ानिस्तान से न जोड़ने की हिदायत दी है। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि कुछ पक्षों द्वारा कश्मीर को अफ़ग़ानिस्तान से जोड़ कर देखना समस्या को खत्म नहीं करेगा, क्योंकि कश्मीर और अफ़ग़ानिस्तान अलग-अलग मसले हैं।