हत्या करने के बाद आरोपित आलम सीधा मस्जिद भागता है। उसे यह आत्मविश्वास कहाँ से आया कि मस्जिद में छिपने से वह सज़ा से बच जाएगा? मीडिया से एक सवाल। अगर मारने वाले का कोई मज़हब नहीं तो बीच-बचाव करने वाले का मज़हब हाइलाइट करना ज़रूरी क्यों?
मृतक त्यागी को 11 लोगों ने घेर कर मारा था। इस हत्याकांड में आरोपितों के परिवार की 4 महिलाएँ भी शामिल थीं। इस घटना को अंजाम देने के बाद आरोपितों ने मस्जिद में शरण लेनी चाही। चर्चा है कि गाँव वाले किसी भी मुस्लिम को घर किराए पर न देने का निर्णय ले सकते हैं।
बेटी से छेड़खानी का विरोध करने जब मृतक ध्रुव त्यागी आरोपितों के घर उसके अब्बा के पास गए तो उन सबने मिलकर त्यागी पर लाठी-डंडे और चाकुओं से हमला कर दिया। उन्होनें पत्थरों से भी मारा। 2 नाबालिग भी इस हत्याकांड में शामिल हैं। पीड़िता के भाई को भी चाकू मारा गया है।
इन केंद्रों को ऐसे बनाया गया था, जिसमें सिर्फ महिला स्टाफ ही थीं। जिनमें पीठासीन अधिकारी से लेकर अन्य स्टाफ तक सिर्फ महिलाएँ ही थीं। इन मतदान केंद्रों पर महिला वोटर खासकर, मुस्लिम महिला वोटरों की संख्या...
सुरेश AAP की रैलियों और सार्वजनिक बैठकों के लिए एक आयोजक के रूप में काम करता था। पुलिस ने पार्टी के रजिस्टर्ड कार्यकर्ता से भी इस बारे में पूछा। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि वो आम आदमी पार्टी के कार्यक्रमों को आयोजित करने में मदद किया करता था।
AAP ने 20 नए डिग्री कॉलेजों के निर्माण का वादा किया था लेकिन अब तक एक पर भी काम शुरू नहीं कराया जा सका है। जितने शिक्षकों की ज़रुरत थी, उससे आधे से भी कम पदों पर नियुक्तियाँ की गई हैं। फ्री वाई-फाई सर्विस से लेकर सीसीटीवी योजना सब की हालत पंक्चर है।
कुछ समय पहले जीवन गुजर-बसर के लिए चाय बेचने वाले भाजपा पार्षद अवतार सिंह को कल उत्तरी दिल्ली का नया मेयर चुन लिया गया है। इस पद पर पहुँचने वाले अवतार पहले दलित सिख हैं।
महेश गिरी को जब पता चला कि उनकी जगह गंभीर को टिकट दिया गया है, उन्होंने तुरंत ट्वीट कर उन्हें शुभकामनाएँ दी जबकि 'बयानवीर' उदित राज जरा सी देरी क्या हुई, पार्टी को ही धमकाने लगे। जानिए उन्हें टिकट से नदारद रखने के पीछे क्या रहे कारण?
नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली से हंस राज हंस का मुक़ाबला कॉन्ग्रेस उम्मीदवार राजेश लिलोठिया से होगा। आम आदमी पार्टी से गठबंधन के विरोधी रहे लिलोठिया दिल्ली कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। आप से यहाँ गुगन सिंह लड़ रहे हैं।
भारत के गौरवशाली इतिहास का एक हिस्सा कई सालों से वर्तनी की त्रुटि के कारण दबा हुआ है। जिन पांडवों ने भारतवर्ष को इंद्रप्रस्थ दिया, उसी इंद्रप्रस्थ (दिल्ली) में उनका नाम कहीं भी नहीं है। और यह हुआ अंग्रेजी के v और r लेटर्स के कारण।