अभी हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 42 में से 18 सीटों पर बड़ी जीत दर्ज करते हुए तृणमूल के गढ़ में काफ़ी मजबूती से दस्तक दी है। भाजपा ने सभी उम्मीदों को पार करते हुए 40% से भी अधिक वोट शेयर हासिल किया, जो अपने आप में बहुत बड़ी बात है।
पश्चिम बंगाल में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाना एक अपराध बन चुका है, जिसके लिए सज़ा भी दी जाती है। ताज़ा मामला कलकत्ता यूनिवर्सिटी का है जहाँ एक कर्मचारी का तबादला सिर्फ़ इसलिए कर दिया गया क्योंकि उसने ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाया था।
ममता बनर्जी अब जहाँ से भी गुज़रेंगी हो सकता है कि उस स्थान को अब पूरी तरह से खाली करा लिया जाए। आमतौर पर उस स्थान को पहले से ही खाली करा लिया जाता है जहाँ नेताओं के विरोध में नारेबाज़ी होने की गुंजाइश हो या फिर उन्हें काले झंडे दिखाए जाने की संभावना हो।
‘जय श्रीराम’ के नारे से तिलमिलाई ममता ने अपनी भड़ास निकालने के लिए ‘जय बांग्ला’ और ‘जय हिंद’ शब्दों का इस्तेमाल शायद एक विकल्प के रूप में चुना है। शब्दों को लेकर ममता बनर्जी की यह सोच उनकी कुंठित मानसिकता को उजागर करती है।
कोलकाता के एक न्यूज़ चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन करते हुए पश्चिम बंगाल के सत्तारूढ़ दल तृणमूल कॉन्ग्रेस के कुछ नेताओं को रिश्वत लेते हुए कैमरे पर पकड़ा था। कोर्ट ने इस मामले में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी की भी आलोचना की थी।
बृहस्पतिवार शाम को ममता बनर्जी नैहाटी में आयोजित होने वाले धरना प्रदर्शन में भाग लेने जा रही थी। रास्ते में रिलायंस जूट मिल के सामने कुछ लोगों ने ममता बनर्जी के काफिले के सामने जय श्री राम का नारा लगाया।
वो मामला (इसे आप धार्मिक कह लें या सांस्कृतिक) जिसने बंगाल की रगों में ममता के विरुद्ध सोच पनपने की जमीन तैयार की। वो मामला राजनीतिक नहीं था। वो मामला RSS या BJP के द्वारा तैयार नहीं किया गया था। बल्कि उस मामले को ममता ने खुद अपने हाथों से तैयार किया। छले गए बंगालियों ने...