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बिहार

मंत्री के घर कचरा फेंकने जा रहे थे पप्पू यादव, ट्रैफिक पुलिस ने काटा 5000 रुपए का चालान

पप्पू यादव ने पटना के कई इलाकों में सफाई अभियान चलाया और कचरे को ट्रैक्टर में लादकर बिहार के नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा के सरकारी आवास पर फेंकने जा रहे थे। इसकी सूचना मिलते ही मंत्री सुरेश शर्मा के आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई और...

शरद यादव के मंच पर आने से पहले कार्यकर्ताओं ने छोड़ा सभागार, कुर्सी को देते रहे भाषण

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इन कार्यकर्ताओं को देखकर लग रहा था जैसे उन्हें शरद यादव को सुनने की कोई जिज्ञासा ही नहीं। इसलिए उन्होंने समय गंवाने से अच्छा सभागार से बाहर निकलना समझा।

छोटे कपड़े पहनकर नाइट पार्टी में जाने को कहता था इमरान, नूरी ने नहीं मानी बात तो दे दिया तीन तलाक!

महिला ने आरोप लगाया, "कई सालों तक मुझपर अत्याचार करने के बाद, कुछ दिन पहले उसने मुझे उसका घर छोड़ने को कहा। लेकिन जब मैंने मना किया, तो उसने मुझे तीन तलाक दे दिया।"

जेपी आंदोलन का जहर तो बिहार के हिस्से आया, लेकिन रत्न कहाँ गए?

इसी आन्दोलन से निकले सुशील कुमार मोदी की सत्तर के दशक में पटना के जलजमाव पर अनशन की तस्वीरें नजर आती हैं। अब वो उप मुख्यमंत्री हैं और पटना के जलजमाव से पिछले ही वर्ष की तरह इस वर्ष भी उनका आवास डूबा रहा।

सांसद जी को खाली करना पड़ा सरकारी बंगला, तो उखाड़ ले गए खिड़की-दरवाजे-टाइल

इसके पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी ऐसी ही हरकत कर चुके हैं। विधानसभा चुनाव हारने के बाद उन्होंने बंगला जब छोड़ा, तो टोंटियाँ तक साथ ले गए थे।

जामा मस्जिद के पास मूर्ति विसर्जन के दौरान हुई पत्थरबाज़ी, थानाध्यक्ष की अमर्यादित भाषा से बिगड़ा माहौल

कोतवाली थानाध्यक्ष ने बताया कि मूर्ति विसर्जन के दौरान जामा मस्जिद के पास कुछ शरारती तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। साथ ही थानाध्यक्ष ने 12 लोगों को गिरफ़्तार किए जाने की पुष्टि की। सभी को कोर्ट में पेशी के बाद जेल भेज दिया गया।

49 सेलेब्स पर नहीं चलेगा देशद्रोह का केस, आरोप ‘शरारतपूर्ण’, अब वकील पर दर्ज होगा FIR

एडीजी हेडक्वार्टर जीतेंद्र कुमार का कहना है कि शिकायतकर्ता, सबूत उपलब्ध करा पाने में नाकाम रहा। इतना ही नहीं, वह उस पत्र को दिखाने में अक्षम रहा जिसके आधार पर उसने इन हस्तियों पर केस करवाया था।

अभी लाखों बिहारी फिर से अपने गाँव-घर जाने को परेशान होंगे

मेरे गर्वीले बिहारियों! मिजोरम या असम जैसे पहाड़ी आतंकवाद ग्रस्त राज्यों से तुलना कर बिहार को महान ठहराकर आप जैसे लोगों ने ही नीतीश तक को शिथिल बना दिया है। किसी नेता को यह उम्मीद ही नहीं है कि कोई उनसे सवाल भी पूछ सकता है ,क्योंकि हम सभी ने शूकरवृत्ति में ही मोक्ष मान लिया है।

मेयर हो तो सीता साहू जैसी! पटना में कितने संप हाउस और नाला उड़ाही के बजट का पता नहीं

मेयर ने हालात की जिम्मेदारी लेने से इनकार करते हुए कहा कि संप हाउस के परिचालन की ज़िम्मेदारी बुडको की है। संप हाउसों का पंप नहीं चला, इस कारण राजधानी का पानी नहीं निकल पाया। उन्होंने नालों की सफाई कराने का भी दावा किया है।

‘अगर हथिया ही सब कुछ है तो इतने बड़े-बड़े हाथी जो हम लोगों ने पाल रखे हैं वो क्यों हैं’

भूकंप, बाढ़ और जल-जमाव जैसी आपदाएँ झेलने के बाद बिहारवासी कम से कम ये सीख लेंगे कि आपदा की स्थिति में किसी और के बदले अपने आप पर भरोसा करना होगा क्योंकि जिनके भरोसे बैठे हैं उस सरकार, राजनैतिक दल, एनजीओ वगैरह में से तो कोई आता नहीं!

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