राहुल ने सदन के अंदर महज 14 चर्चाओं में ही हिस्सा लिया है। उन्होंने सरकार से एक भी धारदार सवाल पूछने की हिम्मत नहीं की। यही नहीं, राहुल गाँधी ने सदन के अंदर एक भी प्राइवेट मेंबर बिल पेश नहीं किया।
राहुल गाँधी हमेशा से ही नए-नए तरीक़ों का इस्तेमाल करके भाजपा के ख़िलाफ़ टीका-टिप्पणी करते नज़र आते हैं। फिर भले ही कॉन्ग्रेस का हर दावा झूठा ही क्यों न साबित हो जाए।
बंगाल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के प्रमुख सोमेंद्र नाथ मित्रा ने भी ममता बनर्जी को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि अगर पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार निर्दोष हैं, तो फिर वह पूछताछ से क्यों बच रहे हैं?
किसान यह समझता है, भले ₹13 का ऋण माफ़ी देने वाले राहुल न समझें, कि ये पैसे उनकी बीड़ी के लिए नहीं है। वो जानते हैं कि इतने पैसों में बुआई के समय वो खेत में बीज रोप सकते हैं।
राहुल गाँधी की दिव्यदृष्टि एक के बाद एक सपने देखने में अब तक लगातार कामयाब रही है। जैसे उनका एक सपना था कि राफेल डील की फ़ाइलें पर्रीकर के बेडरूम में थीं।