सोशल मीडिया समेत ऑपइंडिया के भी कुछ सुझाव हैं कि आने वाले समय में 'नौ बजे नौ मिनट' के नाम पर कैसी दर्द भरी कहानियाँ आ सकती हैं। हमने ये सुझाव वामपंथियों की कम होती क्रिएटिविटी के कारण उन पर तरस खाकर दिए हैं।
CPIM के कट्टर नेता ने व्हाट्सएप ग्रुप मेम्बर को सिर्फ इस कारण ग्रुप से बाहर कर दिया क्योंकि उन्होंने दूरदर्शन पर प्रसरित हो रहे रामायण धारावाहिक की सफलता की खबर शेयर की थी।
इसके बाद मयाबन ने उन्हें डराना शुरू कर दिया। अगर वो किसी से बात कर रही होतीं तो मयाबन गांगुली आ धमकता और और उनके साथी को धक्का देकर अजीब से व्यवहार करता। वो बार-बार प्रियंका को घूरता रहता। एसएफआई वालों को पता था कि प्रियंका डरी हुई हैं, फिर भी वो कॉल कर-कर के धमकी देते थे।
शाहीन बाग़ ने अपने चहेते मीडियाकारों के साथ मिलकर रोज थोड़ा-थोड़ा प्रयासों से दिल्ली में हिन्दुओं के खिलाफ नरसंहार की तैयारियाँ शुरू की। बीस साल के दिलबर नेगी की मौत हो, चाहे आईबी अधिकारी अंकित शर्मा का चार सौ बार चाकुओं से गोदा गया शरीर हो, इस सबकी पटकथा शाहीनबाग ने ही आधार दिया इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
हर्ष मंदर का एक विडियो वायरल हुआ है। इसमें वह सीएए विरोधियों को उकसा रहा है। उनसे कह रहा है कि फैसला न संसद में होगा, न सुप्रीम कोर्ट में होगा, बल्कि फैसला सड़कों पर होगा।
वो आइआइटी कानपुर से पढ़ा हुआ है और फ़िलहाल इंटेल की बेंगलुरु ऑफिस में कार्यरत है। उसने दीनदयाल उपाध्याय के नाम से 'पंडित' हटा दिया। उसने दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन का नाम हटा दिया। वो लगातार ऐसी एडिटिंग कर के हिन्दू-घृणा से ग्रसित लेख बना रहा है।
"तुम लोगों को बेवकूफ बनाना कितना आसान है। जिन्हें ये भी नहीं पता कि INVENTION और POPULARISING में क्या फर्क होता है। क्या तुम्हारी माँ ने अपने पीरियड के दौरान ट्रू इंडोलॉजी की कुत्तियों को खाना खिलाया था?"
केरल के आर्थिक विभाग ने एक आरटीआई के जवाब में बताया है कि करुणा म्यूजिक कॉन्सर्ट के नाम पर कोच्चि म्यूजिक फाउंडेशन की ओर से किसी तरह की कोई डोनेशन CMDRF को प्राप्त नहीं हुई है।
वामपंथी अब सिर्फ़ JNU तक ही सीमित रह गए हैं। दिल्ली में उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं बचा। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में उनका आधार खिसक चुका है। एक केरल में वो किसी तरह टिके हुए हैं।
वरुण ग्रोवर और अनुराग कश्यप जैसों की नज़र अब देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक पर है। उसे धीमे-धीमे बर्बाद करने की साज़िश रची जा रही है। IIT बॉम्बे को चंद वामपंथी प्रोफेसरों व छात्रों ने बंधक बना लिया है। रवीश कुमार व अन्य वामपंथी मीडिया उनका समर्थन कर रहे हैं।