Homeवीडियोकंगना-रिया और टीवी मीडिया सर्कस बनाम सत्ता का नंगा नाच: अजीत भारती का वीडियो...

कंगना-रिया और टीवी मीडिया सर्कस बनाम सत्ता का नंगा नाच: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Riya-Kangana case, TV media vs crazy State

कुछ लोगों का कहना है कि मीडिया ट्रायल हो रहा है। कुछ हद तक कहा भी जा सकता है, लेकिन यदि मीडिया में इस तरह से आवाज नहीं उठाई जाती तो सुशांत का केस आत्महत्या का केस बनकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता, क्योंकि 60 दिनों तक FIR भी नहीं लिखी गई थी।

सुशांत, रिया और कंगना के मुद्दे को लेकर जिस तरह की रिपोर्टिंग हुई है, उस पर काफी लोगों ने हैरानी जताई। कुछ लोगों ने कटाक्ष लिखे और कुछ लोगों ने ट्रोल किया। जिनका चैनल खुद यही काम कर रहा है, उन लोगों ने भी मजाक उड़ाने की कोशिश की कि यह सड़क छाप एटीट्यूड है। यह कुछ भी हो सकता है, लेकिन पत्रकारिता नहीं। यहाँ पर राहुल कंवल की बात हो रही है।

कुछ लोगों का कहना है कि मीडिया ट्रायल हो रहा है। कुछ हद तक कहा भी जा सकता है, लेकिन यदि मीडिया में इस तरह से आवाज नहीं उठाई जाती तो सुशांत का केस आत्महत्या का केस बनकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता, क्योंकि 60 दिनों तक FIR भी नहीं लिखी गई थी। जनमानस के दवाब के बाद ही केस सीबीआई को दिया गया और नए-नए एंगल सामने आ रहे हैं।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारती
अजीत भारती
पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -