Homeवीडियोशाहीन बाग में हिन्दूविरोधी पोस्टर, मज़हबी नारे: अजीत भारती के सवाल | Ajeet Bharti...

शाहीन बाग में हिन्दूविरोधी पोस्टर, मज़हबी नारे: अजीत भारती के सवाल | Ajeet Bharti on Shaheen Bagh’s Hinduphobia

शाहीन बाग काफी समय से मुस्लिमों के मन में बैठा घृणा है। राम मंदिर, तीन तलाक पर फैसला आने और कश्मीर से 370 हटाकर केंद्र-शासित प्रदेश बनाने से आहत मजहबियों इसे हिन्दू-मुस्लिम का ऐंगल दे रहे हैं।

शाहीन बाग के बनने के पीछे का इतिहास यही है कि जामिया में दंगे हुए, बसें जलाई गईं। पुलिस ने दंगाइयों को पकड़ा। बाद में पता चला कि वहाँ 750 फर्जी आई कार्ड बरामद हुए। जामिया नगर इलाके में इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पीएफआई के 150 दंगाई छुपे हुए थे। गोलियाँ चलाई गईं, जमकर पत्थरबाजी की गई, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर स्थति को नियंत्रण में लाया।

शाहीन बाग काफी समय से मुस्लिमों के मन में बैठा घृणा है। राम मंदिर, तीन तलाक पर फैसला आने और कश्मीर से 370 हटाकर केंद्र-शासित प्रदेश बनाने से आहतसमुदाय विशेष वाले इसे हिन्दू-मुस्लिम का ऐंगल दे रहे हैं। कट्टरपंथियों ने अयोध्या में हिन्दुओं के आराध्य राम की मंदिर तोड़कर उसके पिलर पर बाबरी मस्जिद बनाई। शाहीन बाग में हिन्दुओं के पवित्र चिन्ह स्वास्तिक के साथ खिलवाड़ किया गया। हिन्दू महिलाओं को हिजाब में दिखाया गया, इस्लामिक नारे लगाए गए। यानी पूरा हिन्दूफोबिक एजेंडा चलाया गया।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारती
अजीत भारती
पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -