Homeदेश-समाजअयोध्या पर फैसला सुनाने वाले 5 जज उस समय पैदा भी नहीं हुए थे,...

अयोध्या पर फैसला सुनाने वाले 5 जज उस समय पैदा भी नहीं हुए थे, जब दायर हुआ था पहली बार मुकदमा

1989 में जिस समय इस मामले से संबधित मुकदमों को इलाहाबाद हाइकोर्ट स्थानांतरित किया गया था, उस समय ये पाँचों न्यायधीश वकालत की प्रैक्टिस कर रहे थे।

अयोध्या विवाद पर अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाने के बाद सीजेआई रंजन गोगोई समेत संवैधानिक पीठ के पाँचों न्यायधीशों का नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। अब शायद ही कोई ऐसा शख्स हो जिसने इस फैसले का लंबे वक्त से इंतजार किया हो और वो आने वाले समय में इन पाँचों जजों के नाम को भूल पाए। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि दशकों पुराने इस विवाद पर संतोषजनक फैसला सुनाकर मामले को हमेशा के लिए सुलझाने वाले पाँचों न्यायधीशों का जन्म भी उस समय नहीं हुआ था, जब इस विवाद की शुरुआत हुई थी या ये मामला कोर्ट तक पहुँचा था।

साल 1950 में 16 जनवरी को फैजाबाद जिले के स्थानीय कोर्ट में पहली बार इस मामले पर मुकदमा दर्ज हुआ था। इसे दर्ज करने वाले शख्स का नाम गोपाल सिंह विशारद था। जिन्होंने रामलला की पूजा के अधिकार के लिए संरक्षण की गुहार लगाई गई थी। इसके बाद इस मामले में दूसरी याचिका 5 दिसंबर 1950 को रामचंद्र दास द्वारा दायर की गई थी। जिसे 18 सितंबर 1990 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था।

अब ऐसे में तारीखों के अनुरूप यदि पाँचों जजों की उम्र और इस मामले पर दायर हुए पहले मुकदमे की तिथि को देखा जाएगा, तो पता चलेगा कि ऐतिहासिक फैसला सुनाकर देश में अमन कायम करने वाले इन न्यायधीशों का जन्म भी उस समय नहीं हुआ था, जब इस पूरे मामले में पहली और दूसरी बार मुकदमा दायर हुआ।

दरअसल, सीजेआई रंजन गोगोई इन पाँचों न्यायधीशो में उम्र के लिहाज से सबसे बड़े हैं, जिनकी जन्मतिथि 18 नवंबर 1954 है। इसके बाद जस्टिस बोबड़े हैं, जिनका जन्म 24 अप्रैल 1956 को हुआ। वहीं जस्टिस भूषण की जन्म तारीख जुलाई 5, 1956 और जस्टिस नजीर की 5 जनवरी 1958 है, जबकि जस्टिस चंद्रचूड़ इन सब न्यायधीशों में सबसे कम उम्र के हैं, जिनकी जन्मतिथि नवंबर 11, 1959 है।

1989 में जिस समय इस मामले से संबधित मुकदमों को इलाहाबाद हाइकोर्ट स्थानांतरित किया गया था, उस समय ये पाँचों न्यायधीश वकालत की प्रैक्टिस कर रहे थे। पाँचों की नियुक्ति हाईकोर्ट में बतौर जज सन 2000 में या उसके बाद हुई थी, जबकि बाबरी विध्वंस 6 दिसंबर 1992 को हो चुका था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘फोर्स्ड लेबर’ के नाम पर भारत पर 12.5% टैरिफ का USTR प्रस्ताव: क्या सुप्रीम कोर्ट से झटका खाने के बाद ट्रंप खोज रहे नया...

USTR ने भारत सहित कई देशों पर नए टैरिफ का प्रस्ताव दिया है। भारत ने कहा कि प्रक्रिया जारी है और फैसला अभी बाकी है।

टिंडर से दोस्ती, ₹50 लाख की फिरौती और हथौड़े से कत्ल: DU के छात्र आयुष नौटियाल की हत्या केस में इश्तियाक अली दोषी, पढ़ें-...

2018 के चर्चित आयुष नौटियाल मर्डर केस में कोर्ट ने इश्तियाक अली को दोषी करार दिया। पढ़ें अपहरण, फिरौती, हत्या और पुलिस जाँच की पूरी कहानी।
- विज्ञापन -